नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का पुनर्गठन कर दिया है। करीब छह साल बाद गठित किए गए नए बोर्ड में फिल्म और मनोरंजन जगत की कई चर्चित हस्तियों को जगह मिली है। 18 सदस्यीय इस पैनल में अभिनेत्री प्रीति जिंटा, अभिनेता पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, पल्लवी जोशी, प्रोसेनजीत चटर्जी और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज समेत कई नाम शामिल हैं। नए बोर्ड की अध्यक्षता सीबीएफसी की मौजूदा अध्यक्ष शशि शेखर वेंपती करेंगी।
तीन साल के लिए गठित हुआ नया बोर्ड
नए बोर्ड का गठन तत्काल प्रभाव से तीन साल की अवधि के लिए या अगले आदेश तक किया गया है। इनमें से जो भी पहले हो, उसी के अनुसार नियुक्ति प्रभावी रहेगी। यह कदम 29 अगस्त को हुई सीबीएफसी बोर्ड की बैठक के कुछ सप्ताह बाद उठाया गया है। सिनेमा (प्रमाणन) नियम, 2024 के तहत सीबीएफसी बोर्ड की बैठक कम से कम प्रत्येक तिमाही में एक बार आयोजित किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में नए बोर्ड के गठन के बाद इसके कामकाज और बैठकों को लेकर भी नई व्यवस्था लागू होगी।
बोर्ड में सिनेमा जगत के कई बड़े चेहरे
नए पैनल में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों तथा फिल्मकारों को शामिल किया गया है। अभिनेत्री प्रीति जिंटा और पल्लवी जोशी के अलावा पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रोसेनजीत चटर्जी और रूपाली गांगुली को भी बोर्ड का सदस्य बनाया गया है। फिल्म निर्माण से जुड़े नामों में प्रियदर्शन, अभिषेक जैन और निला माधव पांडा शामिल हैं। फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम, निर्माता सुप्रिया यारलागड्डा, कवि एवं लेखक यतींद्र मिश्रा और थिएटर निर्देशक वामन केंड्रे को भी नई टीम में जगह मिली है। संगीतकार रिकी केज के अलावा गायक और पूर्व सांसद हंस राज हंस भी बोर्ड का हिस्सा हैं। अभिनेता मनोज जोशी और निशिगंधा वाड के नाम भी नए पैनल में शामिल हैं।
पिछले बोर्ड से सिर्फ दो सदस्य बरकरार
नए गठन में पिछले बोर्ड के केवल दो सदस्यों को दोबारा जगह मिली है। इनमें थिएटर निर्देशक वामन केंड्रे और लेखक तथा आरएसएस प्रचारक रमेश पटंगे शामिल हैं। बाकी सदस्यों के स्थान पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस बदलाव के साथ बोर्ड में फिल्म उद्योग के अनुभवी चेहरों के साथ कला, साहित्य, संगीत और थिएटर से जुड़े लोगों का प्रतिनिधित्व भी दिखाई देता है।
छह साल तक क्यों नहीं हुआ था पुनर्गठन?
सीबीएफसी का पिछला पूर्ण पुनर्गठन 11 अगस्त 2017 को तीन साल की अवधि के लिए हुआ था। निर्धारित कार्यकाल 2020 में पूरा हो गया था। हालांकि, पुराने बोर्ड के सदस्य नए सदस्यों की नियुक्ति होने तक अपने पद पर बने रहे। इस व्यवस्था को लेकर इस साल संसद में भी सवाल उठाया गया था। सरकार ने बताया था कि सिनेमा (प्रमाणन) नियम, 2024 के नियम 3 के तहत बोर्ड के सदस्य केंद्र सरकार की इच्छा के अनुसार तीन वर्ष की अवधि के लिए पद पर रहते हैं। साथ ही, जब तक उनके स्थान पर नए सदस्य की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वे पद पर बने रह सकते हैं।
कुछ सदस्यों की राजनीतिक-सामाजिक संबद्धताएं भी चर्चा में
नए बोर्ड के गठन के बाद सदस्यों की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में है। रूपाली गांगुली 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थीं। हंस राज हंस भी भाजपा से जुड़े रहे हैं और 2019 से 2024 तक उत्तर-पश्चिम दिल्ली से लोकसभा सांसद रहे। रमेश पटंगे आरएसएस से जुड़े प्रचारक हैं और उन्हें पिछले बोर्ड से नए पैनल में भी रखा गया है। इन नियुक्तियों के अलावा बोर्ड में फिल्म उद्योग से जुड़े ऐसे कई चेहरे भी हैं जिनकी पेशेवर पहचान सिनेमा, संगीत, साहित्य और थिएटर से रही है।
प्रमाणन व्यवस्था में बोर्ड की अहम भूमिका
सीबीएफसी फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करने वाली वैधानिक संस्था है। बोर्ड में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों की नियुक्ति के कारण इसके फैसलों और कार्यप्रणाली पर लगातार सार्वजनिक नजर रहती है। नए 18 सदस्यीय बोर्ड के गठन के बाद अब उसकी नियमित बैठकों और प्रमाणन प्रक्रिया के संचालन पर ध्यान रहेगा। सरकार की ओर से तय तीन साल की अवधि के दौरान यह बोर्ड फिल्मों के प्रमाणन से जुड़े मामलों में अपनी जिम्मेदारियां निभाएगा।