पत्रकारों के समन पर महबूबा का सवाल, उमर की चुप्पी पर नाराज़गी
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई अपनी मुलाकात के दौरान मस्जिदों की प्रोफाइलिंग एवं पत्रकारों को जारी किए जा रहे समन के मुद्दे को नहीं उठाया
मस्जिदों की प्रोफाइलिंग और मीडिया पर दबाव, पीडीपी प्रमुख ने जताई चिंता
- “सम्मानित पत्रकारों को पुलिस स्टेशन बुलाना अस्वीकार्य” – महबूबा मुफ्ती
- गृह मंत्री से मुलाकात में मुद्दा न उठाने पर उमर अब्दुल्ला को घेरा
- महबूबा ने की हस्तक्षेप की अपील, पत्रकारों के उत्पीड़न पर रोक की मांग
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई अपनी मुलाकात के दौरान मस्जिदों की प्रोफाइलिंग एवं पत्रकारों को जारी किए जा रहे समन के मुद्दे को नहीं उठाया।
सुश्री महबूबा ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर पूरी तरह से चुप रही है।
सुश्री महबूबा ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा, “जब उमर की सरकार बनी थी, तब उम्मीद थी कि नागरिकों पर दबाव थोड़ा कम होगा। दुर्भाग्यवश स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि अब सबसे वरिष्ठ एवं सम्मानित पत्रकारों को भी पुलिस स्टेशनों में बुलाया जा रहा है।”
श्रीनगर स्थित राष्ट्रीय मीडिया संगठनों के साथ काम करने वाले कम से कम तीन संवाददाताओं को, जिनमें इंडियन एक्सप्रेस के सहायक संपादक बशारत मसूद भी शामिल हैं, हाल ही में पुलिस ने तलब किया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मसूद को 15 जनवरी से 19 जनवरी के बीच चार बार श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन बुलाया गया और उनसे एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया जबकि दो अन्य पत्रकारों को मौखिक रूप से तलब किया गया।
इस समन पर मीडिया संस्थानों एवं राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पीडीपी प्रमुख ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि निर्वाचित सरकार ने विरोध के बावजूद चुप्पी साध रखी है।
उन्होंने कहा, “कुछ मीडियाकर्मी कश्मीर की घटनाओं पर अपनी जान जोखिम में डालकर रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाया गया और जमानत पर हस्ताक्षर करने के कहा गया। यह स्वीकार्य नहीं है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकार इस मामले पर पूरी तरह से चुप है। उमर साहब ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने मस्जिदों और पत्रकारों की प्रोफाइलिंग का मुद्दा नहीं उठाया। यह दुखद है।”
सुश्री महबूबा ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि पत्रकारों का कथित उत्पीड़न रोका जाए।