तेहरान: महंगाई, गिरती मुद्रा और बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ ईरान में भड़के विरोध-प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। गुरुवार को देश के कई हिस्सों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम छह लोगों के मारे जाने की खबर है। इन घटनाओं के बाद हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं तथा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
लोरडेगन और कुहदश्त में हिंसक झड़पें
पश्चिमी ईरान के लोरडेगन शहर में पुलिस और कथित तौर पर सशस्त्र प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। मानवाधिकार संगठन ‘हेंगा’ ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई अन्य घायल हुए हैं।
वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने जानकारी दी है कि पश्चिमी शहर कुहदश्त में बसीज अर्धसैनिक बल का एक सदस्य मारा गया, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। दोनों पक्षों की ओर से हिंसा के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
कई प्रांतों में फैला आंदोलन
ये विरोध-प्रदर्शन केवल किसी एक शहर तक सीमित नहीं हैं। इस्फहान, मार्वदश्त, केरमानशाह, खुजेस्तान और हामेदान समेत कई प्रांतों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखने को मिले हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस तथा सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां
स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ शहरों में इंटरनेट सेवाओं पर भी आंशिक पाबंदियां लगाई गई हैं ताकि अफवाहों और विरोध प्रदर्शनों के समन्वय को रोका जा सके।
आर्थिक संकट बना विरोध की जड़
बताया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों की शुरुआत महंगाई, रियाल की गिरती कीमत और बढ़ती जीवन-लागत के खिलाफ हुई थी। समय के साथ यह असंतोष व्यापक जनआक्रोश में बदल गया। ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ईरानी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। तेल निर्यात और विदेशी निवेश प्रभावित हुए हैं, जबकि घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में महंगाई दर 40 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और संवाद की पहल
हालात को संभालने के लिए ईरानी सरकार ने संवाद का रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा है कि सरकार व्यापारियों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करेगी। हालांकि उन्होंने बातचीत की विस्तृत रूपरेखा साझा नहीं की।
सरकार का कहना है कि वह जनता की आर्थिक चिंताओं को समझती है और समाधान निकालने के लिए प्रयासरत है, लेकिन साथ ही हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अवकाश और पाबंदियों से हालात काबू में रखने की कोशिश
हाल के दिनों में सरकार ने ठंड का हवाला देते हुए देश के बड़े हिस्से में अवकाश घोषित किया था। इसके चलते कई बाजार, विश्वविद्यालय और सरकारी संस्थान बंद रहे। विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य भीड़भाड़ कम करना और संभावित विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करना था।
नाजुक दौर से गुजरता ईरान
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, मौजूदा हालात ईरान के लिए बेहद नाजुक हैं। एक ओर आर्थिक दबाव और जनता का असंतोष है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है। यदि सरकार महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर ठोस राहत देने में असफल रहती है, तो आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शनों के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, देशभर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और सरकार हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। यह देखना अहम होगा कि सरकार संवाद और नीतिगत कदमों के जरिए स्थिति को शांत कर पाती है या ईरान में अस्थिरता का यह दौर और लंबा खिंचता है।