ओबामा का ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला, वर्तमान दौर की अमेरिकी राजनीति को बताया जोकरों का शो

ओबामा ने वर्तमान राजनीतिक विमर्श को इंटरनेट मीडिया और टेलीविजन पर चल रहे “सर्कस” से तुलना करते हुए कहा कि राजनीति में गंभीरता और गरिमा का स्तर गिरा है।

Update: 2026-02-16 04:12 GMT
वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्तमान ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली और राजनीतिक माहौल पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “क्लाउन शो” यानी “जोकरों का शो” करार दिया है। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस से हाल में जारी बयानबाजी और राजनीतिक आचरण ने अधिकांश अमेरिकियों को असहज और परेशान किया है। ओबामा ने यह टिप्पणी ब्रायन टायलर कोहेन के “नो लाइ” पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान की। उन्होंने न केवल ट्रंप प्रशासन की भाषा और राजनीतिक शैली पर सवाल उठाए, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।

विवादित वीडियो और माफी पर प्रतिक्रिया

बातचीत के दौरान ओबामा ने उस विवादित वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्हें और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा को आपत्तिजनक तरीके से चित्रित किया गया था। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक हलकों में पहले ही बहस छिड़ चुकी थी। ट्रंप प्रशासन की ओर से इसे एक कर्मचारी की गलती बताया गया था और औपचारिक माफी नहीं मांगी गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबामा ने कहा, “यह समझना जरूरी है कि अधिकांश अमेरिकी इस तरह के व्यवहार को बेहद परेशान करने वाला मानते हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि सार्वजनिक जीवन में शालीनता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है, विशेषकर तब जब मामला सर्वोच्च पद से जुड़ा हो।

“मर्यादा और शिष्टाचार का पतन”

ओबामा ने वर्तमान राजनीतिक विमर्श को इंटरनेट मीडिया और टेलीविजन पर चल रहे “सर्कस” से तुलना करते हुए कहा कि राजनीति में गंभीरता और गरिमा का स्तर गिरा है। उन्होंने कहा, “एक तरह का ‘क्लाउन शो’ चल रहा है। सच तो यह है कि उन लोगों में अब कोई शर्म नहीं बची है, जिन्हें पहले लगता था कि पद के प्रति मर्यादा, शिष्टाचार और सम्मान होना चाहिए। वह अब खो गया है।” पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार, लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद का स्तर गिरना और व्यक्तिगत हमले बढ़ना चिंताजनक प्रवृत्ति है।

“मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति”

पॉडकास्ट होस्ट ब्रायन टायलर कोहेन ने जब संवाद के स्तर में गिरावट और आव्रजन अभियानों के दौरान मारे गए नागरिकों को “घरेलू आतंकवादी” कहे जाने पर सवाल किया, तो ओबामा ने इसे एक रणनीतिक विचलन बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार की बयानबाजी अक्सर मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। ओबामा ने जोर देकर कहा कि अधिकांश अमेरिकी आज भी शालीनता, सहिष्णुता और दयालुता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि देश की मूल भावना अभी भी सकारात्मक है, भले ही राजनीतिक मंच पर तीखी बयानबाजी हावी दिखे।

रिपब्लिकन रणनीति पर कटाक्ष

रिपब्लिकन पार्टी की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए ओबामा ने कहा कि मौजूदा राजनीति में स्थापित नियमों और संस्थागत मानकों को कमजोर करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नियमों और परंपराओं को उलझाना या तोड़ना आसान है, लेकिन संस्थाओं को मजबूत करना और रचनात्मक सुधार करना कठिन होता है। ओबामा के अनुसार, लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने से अल्पकालिक राजनीतिक लाभ भले मिल जाए, लेकिन दीर्घकाल में इससे संस्थागत विश्वास को नुकसान पहुंचता है।

डेमोक्रेट्स के लिए चेतावनी

ओबामा ने डेमोक्रेटिक पार्टी को भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मुकाबला करने के लिए “जलाओ और नष्ट करो” जैसी रणनीति अपनाना सही रास्ता नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं नहीं चाहता कि हम सच्चाई की परवाह न करें जैसा कि दूसरा पक्ष कर रहा है। अगर हम उसी तरह से लड़ते हैं, तो हम वह खो देंगे जिसके लिए हम लड़ रहे हैं।” ओबामा का तर्क था कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा केवल विरोध के माध्यम से नहीं, बल्कि नैतिक मानकों को बनाए रखते हुए की जानी चाहिए।

अपने कार्यकाल का उदाहरण

पूर्व राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पास भी राजनीतिक रूप से प्रतिकूल राज्यों के खिलाफ सैन्य या वित्तीय शक्ति के इस्तेमाल के अवसर थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई लोकतंत्र की भावना और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ होती। ओबामा ने इस संदर्भ में यह रेखांकित किया कि सत्ता में होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका मनमाना उपयोग किया जाए। लोकतंत्र में शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और संतुलन के साथ होना चाहिए।

लोकतंत्र के रक्षकों के लिए संदेश

साक्षात्कार के अंत में ओबामा ने अपने समर्थकों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों से अपील की कि वे निराश न हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा का कार्य कभी आसान नहीं रहा। यह हमेशा धैर्य, साहस और सतत प्रयास की मांग करता है। ओबामा के अनुसार, कठिन परिस्थितियों में भी नागरिकों को संस्थाओं और मूल्यों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद अमेरिका की लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत है और उसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत

ओबामा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा रहा है और चुनावी माहौल भी गर्म है। ट्रंप प्रशासन और विपक्षी डेमोक्रेट्स के बीच बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति का यह हस्तक्षेप आगामी राजनीतिक विमर्श को और धार दे सकता है। स्पष्ट है कि अमेरिकी राजनीति में शालीनता, संवाद और संस्थागत मर्यादा को लेकर बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है। अब यह देखना होगा कि ओबामा की टिप्पणियों का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ता है।

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