अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: आने वाले हफ्तों में हो सकता है बड़ा सैन्य ऑपरेशन, 12 वॉरशिप-सैकड़ों फाइटर जेट तैयार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित अमेरिकी कार्रवाई जून में इजरायल द्वारा किए गए 12-दिवसीय हमले से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है। यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को निशाना बना सकता है। बताया जा रहा है कि पेंटागन संभावित ईरानी जवाबी हमले को देखते हुए क्षेत्र में अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है।

Update: 2026-02-19 04:12 GMT
वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई का फैसला करता है तो वह सीमित या प्रतीकात्मक नहीं होगी, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला व्यापक ऑपरेशन हो सकता है। इस संभावित टकराव में इजरायल की भागीदारी की भी चर्चा है। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट में एक व्हाइट हाउस अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के रवैये से बेहद नाराज हैं और सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले हफ्तों में हमले की संभावना 90% तक आंकी जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

‘छोटी कार्रवाई नहीं, लंबा ऑपरेशन’ की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित अमेरिकी कार्रवाई जून में इजरायल द्वारा किए गए 12-दिवसीय हमले से कहीं अधिक व्यापक हो सकती है। यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को निशाना बना सकता है। बताया जा रहा है कि पेंटागन संभावित ईरानी जवाबी हमले को देखते हुए क्षेत्र में अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है। कुछ अमेरिकी कर्मियों को एहतियातन मध्य-पूर्व से अस्थायी रूप से हटाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन पिछले महीने वेनेजुएला में हुई सीमित कार्रवाई से कहीं बड़ा हो सकता है।

इजरायली अधिकारियों की चेतावनी

इजरायल की सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख आमोस यादलिन ने कहा है कि संघर्ष की आशंका पहले से कहीं अधिक है। उनके अनुसार, “हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, लेकिन कोई महाशक्ति अचानक युद्ध शुरू नहीं करती। कूटनीति के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।” यादलिन ने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद हैं। पेंटागन के कुछ अधिकारी इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं हैं कि सैन्य कार्रवाई से दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ क्या होगा। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप का रुख सख्त दिखाई दे रहा है। उनका “सभी विकल्प खुले हैं” वाला बयान संभावित सैन्य तैयारी का संकेत माना जा रहा है। इजरायल के कुछ अन्य अधिकारियों ने भी कहा है कि देश “कुछ ही दिनों में” संभावित युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रह सकता है। उनका मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए निर्णायक कदम जरूरी है।

‘इस वीकेंड हमला संभव’ – सीबीएस रिपोर्ट

सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना शनिवार को भी हमला करने में सक्षम है। हालांकि, अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रशासन संभवतः इस वीकेंड के बाद स्थिति की समीक्षा कर अंतिम निर्णय ले सकता है। व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सैन्य गतिविधियों में तेजी से संभावित कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।

मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, करीब एक दर्जन युद्धपोत, सैकड़ों फाइटर जेट और कई एयर डिफेंस सिस्टम क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। ओपन-सोर्स ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 150 से अधिक कार्गो उड़ानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद क्षेत्र में भेजे गए हैं। इसके अलावा 50 से अधिक फाइटर जेट—जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं—मिडिल ईस्ट में तैनात किए गए हैं। एक वरिष्ठ सलाहकार के हवाले से कहा गया है कि हालांकि कुछ लोग युद्ध के खिलाफ सलाह दे रहे हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

रूस-ईरान नौसैनिक अभ्यास 

इस बढ़ते तनाव के बीच ईरान और रूस ने ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है। यह कदम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हाल ही में हॉर्मुज स्ट्रेट के पास सैन्य अभ्यास किया और कुछ घंटों के लिए समुद्री आवाजाही आंशिक रूप से रोक दी। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हॉर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक तेल आपूर्ति की धुरी

हॉर्मुज स्ट्रेट अपनी सबसे संकरी जगह पर लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का अधिकांश तेल और गैस निर्यात इसी रास्ते से होता है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस मार्ग का कोई पूर्ण व्यावहारिक विकल्प नहीं है, हालांकि कुछ देशों ने पाइपलाइन के जरिए आंशिक विकल्प विकसित किए हैं। यदि यहां तनाव बढ़ता है या आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक तेल कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक असर पड़ सकता है।

कूटनीतिक कोशिशें जारी


तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। मंगलवार को ट्रंप के सलाहकार जेराड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन घंटे तक बातचीत की। दोनों पक्षों ने बातचीत को “उपयोगी” बताया, लेकिन बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कुछ बिंदुओं पर प्रगति हुई है, लेकिन राष्ट्रपति की निर्धारित ‘रेड लाइंस’ को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीति अपनी सीमा के करीब पहुंच चुकी हो सकती है।

बैलिस्टिक मिसाइल विवाद: बातचीत में सबसे बड़ा अड़ंगा

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद बन गया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों जैसे हिजबुल्लाह और हूती को समर्थन पर भी चर्चा करे। लेकिन ईरान इसे अपनी ‘रेड लाइन’ बता रहा है। तेहरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम रक्षात्मक है और किसी भी समझौते में इसे शामिल नहीं किया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहनी चाहिए। ईरान का तर्क है कि जून 2025 में जब उसके परमाणु ठिकानों पर हमले हुए, तब उसकी मिसाइल क्षमता ने ही रक्षा सुनिश्चित की। इसलिए इस कार्यक्रम से समझौता करना राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता होगा।

क्या युद्ध टल सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति बेहद नाजुक है। सैन्य तैयारियों और कूटनीतिक प्रयासों का समानांतर चलना संकेत देता है कि दोनों पक्ष अभी अंतिम निर्णय से पहले सभी विकल्पों का आकलन कर रहे हैं। यदि कूटनीति विफल होती है, तो संभावित सैन्य कार्रवाई न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक प्रभाव डाल सकती है खासतौर पर ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। आने वाले कुछ दिन और हफ्ते यह तय करेंगे कि तनाव वार्ता की मेज पर सुलझेगा या युद्ध के मैदान में।

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