न्यूयॉर्क में अमेरिका-ईरान के बीच 3 घंटे बातचीत:ईरान की शर्त- अमेरिका दबाव घटाए तो होर्मुज खोलने तैयार

वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर आई कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के आवागमन के लिए खोल सकता है।;

Update: 2026-09-23 06:22 GMT

वॉशिंगटन/तेहरान : पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बातचीत की संभावना दिखाई देने लगी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए दोनों देशों के नेता न्यूयार्क में हैं और इसी बीच ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर एक प्रस्ताव सामने आने की खबर ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के दौरान मंगलवार को न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच करीब 3 घंटे बातचीत हुई। इस बातचीत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए। कतर के अधिकारियों ने इसकी मध्यस्थता की।

वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से मंगलवार को खबर आई कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के आवागमन के लिए खोल सकता है। बताया गया कि यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिये पहले ही अमेरिका तक पहुंचाया जा चुका है और इसके साथ दोनों देशों के बीच स्थायी रूप से शत्रुता खत्म करने के लिए बातचीत फिर शुरू करने की पेशकश भी की गई है। हालांकि, बाद में ईरान की ओर से इस सात दिन में होर्मुज खोलने के प्रस्ताव की खबर को खारिज किए जाने की बात भी सामने आई। ऐसे में फिलहाल इसे तेहरान की ओर से आधिकारिक और अंतिम प्रस्ताव मानना जल्दबाजी होगी। फिर भी यह घटनाक्रम इस बात का संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच बंद पड़ी कूटनीतिक राह को फिर खोलने की कोशिशें चल रही हैं।

न्यूयॉर्क में आमने-सामने आ सकते हैं ट्रंप-पेजेश्कियान

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए न्यूयार्क पहुंच रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पेजेश्कियान से मुलाकात की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हालांकि, ईरानी पक्ष से संकेत है कि दोनों नेताओं की औपचारिक मुलाकात की फिलहाल कोई तय योजना नहीं है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए अधिकार दिए जाने की बात कही गई है। एनबीसी न्यूज से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी बातचीत के दरवाजे खुले होने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत करने में कोई नुकसान नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पेजेश्कियान ईरान में अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति नहीं हैं। अमेरिकी पक्ष ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानता है।

तेहरान की शर्त-दबाव कम हो, तभी बातचीत आगे बढ़े

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका को यह स्पष्ट करना होगा कि वह पश्चिम एशिया संकट का समाधान कूटनीतिक तरीके से चाहता है। इसके बाद बातचीत की प्रक्रिया और उसकी समयसीमा तय की जा सकती है। तेहरान का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने का महत्वपूर्ण मंच बन सकती है। ईरान की ओर से पहले भी युद्ध समाप्त करने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और आर्थिक दबाव कम करने जैसी शर्तें सामने रखी गई हैं। कतर दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

खाड़ी देशों के साथ भी अमेरिकी बातचीत

अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत चल रही है। सोमवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्यों ने ट्रंप से मुलाकात की। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, बैठक में कतर की ओर से ईरान और अरब खाड़ी देशों को एक साझा सुरक्षा ढांचे में लाने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। बताया गया है कि ईरान इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

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