वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने 2 नवंबर को ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर ड्रोन हमला किया। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) ने द्वीप पर पांच धमाकों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिका के दो ड्रोन मार गिराए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान होना है। ट्रंप के सामने रिपब्लिकन पार्टी का सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केशम द्वीप पर हमला हाल के सप्ताहों में ईरान के खिलाफ किए गए सीमित सैन्य हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
केशम द्वीप पर पांच धमाकों की आवाज
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, केशम द्वीप पर पांच धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी अधिकारियों ने द्वीप पर हमले की जानकारी दी है, लेकिन हमले के स्वरूप और उसके प्रभाव को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, यह हमला 2 नवंबर को किया गया था। हाल के हफ्तों में अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ कुछ सीमित हमले किए गए हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि इन अभियानों को छोटे स्तर पर रखा गया और इनके बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित रही, ताकि इन्हें ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने के संकेत के रूप में न देखा जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल ही में पूछा गया था कि क्या वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने की धमकी पर अमल करेंगे। इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि तेहरान के साथ समझौता संभव हो सकता है। ऐसे में ताजा हमले के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत और सैन्य तनाव को लेकर स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है।
ईरान का दावा- दो अमेरिकी MQM-170 ड्रोन मार गिराए
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में केशम द्वीप के दक्षिण में अमेरिका के दो ड्रोन मार गिराए। ईरानी पक्ष के मुताबिक, इन ड्रोन के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। IRGC ने इन ड्रोन को MQM-170 बताया है। ईरान का दावा है कि इस घटना के बाद उसके कब्जे में आए ऐसे ड्रोन की कुल संख्या चार हो गई है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इन दो ड्रोन के गिराए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
अमेरिका के लिए क्यों अहम है केशम द्वीप?
केशम द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। पहले यह फ्री ट्रेड जोन और पर्यटन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसे ईरान की सैन्य रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, द्वीप के नीचे सुरंगों और प्राकृतिक नमक की गुफाओं का नेटवर्क मौजूद है। ईरान ने कथित तौर पर इन क्षेत्रों में तटीय मिसाइल प्रणालियों और तेज हमला करने वाली नौकाओं को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया है। हालांकि, इन सैन्य ठिकानों के बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है। केशम द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भी अहम बनाती है। यहां से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के प्रमुख तेल और गैस परिवहन मार्गों में शामिल है। अमेरिका का आरोप रहा है कि ईरान इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी का इस्तेमाल जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने और दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमले की चर्चा
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव के बाद ईरान पर एक और हमले की कोशिश कर सकते हैं। इन रिपोर्टों में कहा गया था कि ईरान के साथ फिर से व्यापक युद्ध की स्थिति बनने पर इजरायल में आपातकालीन सरकार बनाने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं, अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का राजनीतिक असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान मंगलवार को होना है। भारतीय समय के मुताबिक, मतदान शाम साढ़े चार बजे से शुरू होगा। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी
ताजा हमले ऐसे समय हुए हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष राजनयिक बातचीत जारी रहने की जानकारी सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को कहा था कि दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेज रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कतर की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ाने के लिए दोहा का दौरा किया था। इससे संकेत मिलता है कि सैन्य तनाव के बीच दोनों पक्ष संवाद के रास्ते भी खुले रखे हुए हैं।
फरवरी के हमलों और जून के समझौते के बाद फिर बढ़ा तनाव
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में तेहरान ने क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाने की कार्रवाई की। बाद में अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ। इसके बाद 18 जून को अमेरिका और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता से संबंधित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, समुद्री मार्ग की सुरक्षा और संचालन को लेकर मतभेदों के कारण समझौते को लागू नहीं किया जा सका। अब केशम द्वीप पर हमले और अमेरिकी ड्रोन गिराने के ईरानी दावे ने क्षेत्रीय तनाव को फिर बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच सैन्य घटनाक्रम के साथ-साथ मध्यस्थों के जरिए चल रही बातचीत पर भी नजर बनी हुई है।