तेहरान: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भारत और इजरायल के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को लेकर एक नया तर्क पेश किया है। ईरान की राजधानी तेहरान में हुई चार देशों की बैठक के दौरान मुनीर ने कथित तौर पर हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ती नजदीकी को पाकिस्तान और मुस्लिम देशों के लिए खतरे के रूप में प्रस्तुत किया। इस दावे का खुलासा ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने एक साक्षात्कार में किया। ईरानी सरकारी प्रसारक आइआरआइबी के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल की गतिविधियों और पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों पर चर्चा हुई। मुनीर की कथित टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत और इजरायल के बीच रक्षा, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत और इजरायल के संबंधों को लेकर चिंता जताता रहा है। हालांकि, तेहरान बैठक में हिंदुओं और यहूदियों की निकटता को लेकर मुनीर की टिप्पणी का विवरण ईरानी अधिकारी के साक्षात्कार पर आधारित है।
तेहरान में चार देशों की बैठक, क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा
26 अक्टूबर को तेहरान में आयोजित बैठक में पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और ईरान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल से जुड़े घटनाक्रम और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर विचार-विमर्श करना था। इस बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई शामिल हुए। चारों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच तनाव, विभिन्न देशों की सुरक्षा चिंताएं और भविष्य की रणनीति बैठक के प्रमुख विषय रहे।
इजरायल के बाद तुर्किये और सऊदी अरब को निशाना बनाने की आशंका
ईरानी अधिकारी मोहसेन रेजाई ने साक्षात्कार में दावा किया कि बैठक के दौरान सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने इजरायल की संभावित रणनीति को लेकर चिंता जताई। रेजाई के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री ने आशंका व्यक्त की कि इजरायल पहले ईरान और उसके बाद तुर्किये तथा सऊदी अरब को निशाना बना सकता है। इस कथित आशंका के पीछे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों और इजरायल की सैन्य गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया गया। रेजाई ने यह भी कहा कि तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन ने इजरायल से जुड़े सुरक्षा खतरे पर कड़ा रुख अपनाया। उनके अनुसार, बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर गंभीरता से चर्चा की।
मुनीर ने भारत-इजरायल संबंधों को भी जोड़ा
रेजाई के दावे के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने बैठक में इजरायल के साथ-साथ भारत का मुद्दा भी उठाया। बताया जाता है कि उन्होंने हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ती निकटता को मुस्लिम देशों के लिए खतरे के रूप में पेश करने की कोशिश की। मुनीर की कथित टिप्पणी भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और तकनीकी क्षेत्र में संबंधों का विस्तार हुआ है। पाकिस्तान की रणनीतिक चिंताओं में भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों की भूमिका लंबे समय से शामिल रही है। ऐसे में भारत-इजरायल संबंधों को धार्मिक आधार पर प्रस्तुत करना पाकिस्तान की क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा विमर्श का हिस्सा माना जा सकता है। मुनीर इससे पहले भी हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक अंतर को लेकर बयान देते रहे हैं। उनके विचारों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तथा वैचारिक मतभेद सामने आते रहे हैं।
चारों देशों ने बातचीत जारी रखने पर जताई सहमति
मोहसेन रेजाई ने दावा किया कि पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के प्रतिनिधियों ने स्वयं ईरान आकर बातचीत करने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, बैठक में तीनों देशों ने इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की। रेजाई ने यह भी बताया कि चारों पक्षों ने भविष्य में बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। इसके तहत पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के ईरान दौरे की संभावना भी व्यक्त की गई। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग के मुद्दों पर चारों देशों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है।
पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण
तेहरान में हुई बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इजरायल और ईरान के बीच तनाव, क्षेत्रीय देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएं और भारत-इजरायल संबंधों को लेकर पाकिस्तान की चिंताएं इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती हैं। मुनीर की कथित टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे को धार्मिक पहचान और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के साथ जोड़कर प्रस्तुत कर रहा है। वहीं, ईरान की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार, बैठक में शामिल देशों ने सुरक्षा चुनौतियों पर बातचीत जारी रखने का फैसला किया है।