ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी: प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका करेगा कार्रवाई

ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई या उनके साथ बेरहमी की गई, तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Update: 2026-01-02 10:28 GMT
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई या उनके साथ बेरहमी की गई, तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दिया। उन्होंने लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है या उन्हें बेरहमी से मारता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी हैं।

ईरान में बढ़ता जनाक्रोश, पवित्र शहरों तक फैला आंदोलन
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान से निकलकर देश के कई बड़े शहरों और धार्मिक केंद्रों तक फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने न केवल आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठाई है, बल्कि सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता खामेनेई के इस्तीफे की मांग भी की है।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के समर्थन में नारे लगाए। खास बात यह है कि आंदोलन अब शिया मुसलमानों के पवित्र शहर कोम तक पहुंच गया है, जिसे ईरान में धर्मगुरुओं का मजबूत गढ़ माना जाता है। कोम में विरोध प्रदर्शनों को सरकार के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

हिंसक झड़पें, अब तक 7 मौतें
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह हिंसक झड़पें हुई हैं। 1 जनवरी को हुई घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि इससे एक दिन पहले 31 दिसंबर को एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो चुकी थी। अब तक इन प्रदर्शनों में छह आम नागरिकों और एक सुरक्षा बल के जवान की मौत की पुष्टि हुई है। कई लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं, हालांकि ईरानी सरकार ने घायलों और गिरफ्तार लोगों के सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

व्यापारियों से युुुवा तक, आंदोलन का दायरा बढ़ा
इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के व्यापारियों ने की थी, जो लगातार बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट से परेशान थे। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और अब इसमें बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी भी शामिल हो चुकी है। युवा प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से जुड़कर सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं और खुलकर राजनीतिक बदलाव की मांग कर रहे हैं। यह सरकार के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि ईरान की आबादी में युवाओं की संख्या काफी अधिक है।

अमेरिका-ईरान तनाव का पुराना इतिहास
अमेरिका और ईरान के रिश्ते पहले से ही बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। इससे पहले अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हमले कर चुका है। जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक चला युद्ध भी इसी तनाव का बड़ा उदाहरण रहा। उस संघर्ष में अमेरिका ने इजराइल का समर्थन किया था और प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल हो गया था। इस पृष्ठभूमि में ट्रंप की नई चेतावनी को ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

पूरी दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में हिंसा और बढ़ती है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया और सख्त हो सकती है। वहीं ईरानी सरकार के सामने चुनौती है कि वह या तो प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान दे या फिर कड़े दमन के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करे। फिलहाल ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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