ईरान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन तेज, 35 की मौत, 1200 से ज्यादा हिरासत में; अमेरिका-इजरायल की दखल पर नजर

पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालात ऐसे हैं कि प्रदर्शनों के थमने के कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।

Update: 2026-01-06 21:39 GMT
तेहरान। ईरान में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गहराते आर्थिक संकट के खिलाफ जनाक्रोश अब व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले एक सप्ताह से ज्यादा समय से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालात ऐसे हैं कि प्रदर्शनों के थमने के कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। सरकार ने सुरक्षा बलों को सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।

250 से अधिक स्थानों पर आगजनी और नारेबाजी
अमेरिका आधारित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, ईरान के 31 में से 27 प्रांतों में 250 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। एजेंसी ने बताया कि इन प्रदर्शनों में अब तक 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षा बलों के दो सदस्य मारे गए हैं। संगठन का दावा है कि ये आंकड़े ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए जुटाए गए हैं और इससे पहले भी अशांति के दौर में एजेंसी की रिपोर्टिंग काफी हद तक सही साबित हुई थी।

प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। कई शहरों में सरकारी इमारतों, बैंकों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। महंगाई, मुद्रा के अवमूल्यन और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने आम जनता का गुस्सा और भड़का दिया है।

सरकार का दावा: सैकड़ों सुरक्षाकर्मी घायल
वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीबी मानी जाने वाली अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने सोमवार देर रात दावा किया कि प्रदर्शनों के दौरान 250 पुलिसकर्मी और बसीज बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं। फार्स के मुताबिक, प्रदर्शन कई जगह हिंसक हो गए, जहां सुरक्षा बलों पर पथराव किया गया और आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी मीडिया इन प्रदर्शनों को “दंगे” और “अराजकता” करार दे रहा है और आरोप लगा रहा है कि इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह घरेलू समस्याओं से उपजा है और इसका मकसद आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठाना है।

राष्ट्रपति ने जांच के आदेश दिए
इस बीच, खबर है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गृह मंत्रालय को एक विशेष टीम गठित कर पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करने के आदेश दिए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह टीम प्रदर्शनकारियों की मौत, हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की समीक्षा करेगी। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इससे पहले भी ऐसे वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में खास बदलाव नहीं आया।

खामेनेई का सख्त संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में इन प्रदर्शनों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि “दंगाइयों को उनकी सही जगह भेजा जाएगा।” उनके इस बयान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा बलों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखें। जानकारों का मानना है कि खामेनेई के बयान से यह साफ हो गया है कि सरकार इस आंदोलन को दबाने के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। इससे आने वाले दिनों में हिंसा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

हिरासत और इंटरनेट पाबंदियां
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों को बिना किसी स्पष्ट आरोप के हिरासत में लिया गया है। कई शहरों में इंटरनेट सेवाओं पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकि सूचनाओं का प्रसार रोका जा सके। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच भी सीमित कर दी गई है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि यह कदम अफवाहों और हिंसा को फैलने से रोकने के लिए उठाए गए हैं, जबकि आलोचकों का आरोप है कि सरकार सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रही है।

अमेरिका और इजरायल की नजर, दखल की चर्चा
ईरान में बल प्रयोग की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ईरान की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और संभावित दखल के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। यरुशलम पोस्ट ने विभिन्न सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों देशों के अधिकारी हालात बिगड़ने की स्थिति में जवाबी कदमों का आकलन कर रहे हैं। पिछले शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरानी सुरक्षा बल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हैं, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। ट्रंप के इस बयान को ईरान ने अपने आंतरिक मामलों में खुली दखलअंदाजी बताया।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान पर ईरानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। सरकारी प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा, “उसके हाथ काट दिए जाएंगे।” तेहरान का कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मकसद ईरान को अस्थिर करना है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

आर्थिक संकट बना आंदोलन की जड़ 
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा आंदोलन की जड़ में ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, मुद्रा के अवमूल्यन और तेल निर्यात में गिरावट ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। महंगाई दर कई इलाकों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और बुनियादी जरूरतों की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। युवाओं में बेरोजगारी और भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना भी इस गुस्से को और हवा दे रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और आर्थिक राहत चाहते हैं।

प्रदर्शनकारी पीछे हटने के मूड में नहीं

फिलहाल, ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। सरकार जहां सख्ती के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल की संभावित भूमिका ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो ईरान को न केवल आंतरिक अस्थिरता बल्कि बाहरी दबावों का भी सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह आंदोलन केवल एक अस्थायी उबाल बनकर रह जाएगा या ईरान की राजनीति और नीतियों पर गहरा असर डालेगा।

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