UNGA में पेजेश्कियन का अमेरिका-इजरायल पर हमला, बोले- ईरान आतंकवादी नहीं, आतंकवाद का पीड़ित

पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान की आलोचना करने वालों को आतंकवादी कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।;

Update: 2026-09-23 14:43 GMT

न्यूयॉर्क: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले और आम नागरिकों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को आतंकवादी बताए जाने वाले आरोप का जवाब देते हुए कहा कि उनका देश आतंकवाद फैलाने वाला नहीं, बल्कि आतंकवाद और हमलों का शिकार रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनके देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया और स्कूलों समेत नागरिक ठिकानों पर हमले हुए। उन्होंने इजरायल पर हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या का भी आरोप लगाया और कहा कि यह घटना उनके शपथ ग्रहण के दिन हुई थी।

‘ईरान हमलावर नहीं, पीड़ित देश’

पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने लंबे समय से किसी दूसरे देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई नहीं की है, जबकि उनके मुताबिक ईरान लगातार हमलों का सामना करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 200 वर्षों में ईरान ने किसी देश पर हमला नहीं किया। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश अपनी सुरक्षा के लिए जवाब देने को मजबूर हुआ। उन्होंने कहा कि ईरान अपने नागरिकों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। पेजेश्कियन ने यह भी दावा किया कि ईरानी लोग देश के समर्थन में सड़कों पर उतर रहे हैं।

अमेरिका-इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप

पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान की आलोचना करने वालों को आतंकवादी कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। पेजेश्कियन के अनुसार, ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने बचाव में पूरी ताकत का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके दावे के मुताबिक ईरानी कार्रवाई में आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया।

‘ईरान अपनी रक्षा के लिए किसी की अनुमति नहीं लेगा’

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अपने देश की सुरक्षा के लिए ईरान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान को इतना सक्षम होना चाहिए कि कोई भी उसके खिलाफ हमला करने से पहले कई बार सोचे। पेजेश्कियन ने कहा कि अपने देश की रक्षा के लिए ईरान को किसी अन्य देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बनाए गए ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया और इससे देश की खाद्य सुरक्षा तथा बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा।

परमाणु हथियार नहीं बनाने का दावा

अपने संबोधन में पेजेश्कियन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक के इस्तेमाल और विकास को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों को सुरक्षा के लिए खतरा नहीं मानता। पेजेश्कियन ने क्षेत्रीय स्थिरता और अपने देश की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही।

‘पूरी ताकत से किया अपना बचाव’

पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के पास आधुनिक तकनीक और उन्नत हथियार हैं, लेकिन ईरान ने हमलों का सामना करते हुए अपनी रक्षा की। उन्होंने हमलों को ‘कायरतापूर्ण’ बताते हुए कहा कि इनका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा। ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनके देश ने अमेरिकी हमलों का जवाब दिया, लेकिन नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया। हालांकि, इन दावों और संघर्ष से जुड़े नुकसान के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

युद्ध के बाद पहली UNGA उपस्थिति का संदर्भ

पेजेश्कियन का यह संबोधन अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की स्थिति रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। ईरान के मुताबिक, हालिया हमलों में उसके वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व को नुकसान पहुंचा तथा कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों को लेकर अलग-अलग आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में UNGA में पेजेश्कियन का संबोधन ईरान की ओर से अपने पक्ष और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को वैश्विक मंच पर रखने का प्रयास रहा।

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