न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन: सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश से जुड़े मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिकी संघीय अदालत में अपने खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को स्वीकार कर लिया है। 54 वर्षीय गुप्ता ने मैनहटन की संघीय अदालत में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष सुपारी देकर हत्या की कोशिश, हत्या की साजिश और मनी लांड्रिंग की साजिश जैसे तीन गंभीर आरोपों में दोषी होने की बात मानी। पन्नू की हत्या की साजिश रचने के मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की जेल की सजा सुनाई गई। 29 मई को सजा का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
संघीय अदालत में स्वीकारोक्ति
निखिल गुप्ता उर्फ ‘निक' ने न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित संघीय न्यायालय में अपनी स्वीकारोक्ति दर्ज कराई। यह कार्यवाही मजिस्ट्रेट जज के समक्ष हुई। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार गुप्ता ने तीनों आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इनके परिणामों की जानकारी है। उनके वकीलों की ओर से इस घटनाक्रम पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इन आरोपों में मर्डर-फॉर-हायर, मर्डर-फॉर-हायर की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल है। इससे पहले, जब उन्हें अमेरिका लाया गया था, तब उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। अब दोष स्वीकार करने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण
निखिल गुप्ता को जून 2024 में चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। अमेरिकी एजेंसियों ने उन पर आरोप लगाया था कि वे अमेरिका की धरती पर एक हत्या की साजिश में शामिल थे। प्रत्यर्पण से पहले वे यूरोप में हिरासत में थे। अमेरिका पहुंचने के बाद उन्हें संघीय हिरासत में रखा गया। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से वे न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे थे। शुरुआती पेशी में उन्होंने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन अब अदालत में दोष स्वीकार कर लिया है।
क्या हैं आरोप?
अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार निखिल गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने एक भारतीय सरकारी अधिकारी के साथ मिलकर अमेरिका में रहने वाले सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, भारत के एक पूर्व अफसर विकास यादव ने निखिल गुप्ता से पन्नू की हत्या की साजिश रचने को कहा था। अभियोजन पक्ष का दावा है कि हत्या की योजना के तहत न्यूयॉर्क में 15,000 अमेरिकी डॉलर का अग्रिम भुगतान किया गया था। इसी वित्तीय लेन-देन को मनी लांड्रिंग साजिश के आरोप का आधार बनाया गया है।
पन्नू कौन हैं?
गुरपतवंत सिंह पन्नू मूलरूप से पंजाब के खानकोट का रहने वाला है। गुरपतवंत सिंह पन्नू खालिस्तान समर्थक संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से जुड़ा है और भारत सरकार ने उन्हें पहले ही आतंकवाद से संबंधित मामलों में नामित किया है। भारत सरकार ने 2019 में आतंकी गतिविधियां चलाने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत पन्नू के संगठन SFJ पर बैन लगाया। पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है और वह लंबे समय से विदेश में रह रहा है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि कथित साजिश का लक्ष्य पन्नू को अमेरिकी धरती पर निशाना बनाना था, जिससे यह मामला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के दायरे में आ गया।
पन्नू पर साल 2020 में अलगाववाद को बढ़ावा देने और पंजाबी सिख युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2020 को पन्नू को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया।
अधिकतम 40 साल की सजा संभव
निखिल गुप्ता ने जिन तीन आरोपों को स्वीकार किया है, उनमें प्रत्येक के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। संयुक्त रूप से उन्हें अधिकतम 40 वर्ष तक की सजा हो सकती है। हालांकि अंतिम सजा अदालत द्वारा निर्धारित की जाएगी, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ-साथ अन्य परिस्थितियों पर भी विचार किया जाएगा। 29 मई को सजा का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
राजनयिक और कानूनी प्रभाव
यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी संवेदनशील माना जा रहा है। अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि साजिश में एक भारतीय सरकारी अधिकारी की भूमिका थी,।इस प्रकरण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि इसमें एक विदेशी नागरिक, कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश और दो देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका शामिल है।
रियायत की सिफारिश
अब जब निखिल गुप्ता ने अदालत में आरोप स्वीकार कर लिए हैं, तो मुकदमे की दिशा सजा निर्धारण की ओर बढ़ेगी। अदालत यह भी देखेगी कि दोष स्वीकार करने के बदले अभियोजन पक्ष की ओर से किसी प्रकार की सजा में रियायत की सिफारिश की जाती है या नहीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दोष स्वीकार करने से मुकदमे की लंबी सुनवाई से बचा जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय के विवेक पर निर्भर करेगा।
राजनयिक और राजनीतिक प्रभाव
गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश से जुड़े इस मामले में निखिल गुप्ता की स्वीकारोक्ति एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण, प्रारंभिक इनकार और अब दोष स्वीकार करने की प्रक्रिया ने इस प्रकरण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाली 15 मार्च की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, जब यह तय होगा कि गुप्ता को कितनी सजा दी जाएगी। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनयिक और राजनीतिक प्रभाव भी दूरगामी हो सकते हैं।