ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। 13वें आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद उसके नेता तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ मिली इस जीत ने न केवल बीएनपी की सत्ता में वापसी सुनिश्चित की है, बल्कि 17 वर्षों के निर्वासन के बाद तारिक रहमान को देश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। कभी जिस देश से उन्हें दूर रहना पड़ा, अब उसी देश की बागडोर उनके हाथों में आने जा रही है। यह कहानी सिर्फ एक राजनीतिक उत्तराधिकारी की नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव, विवाद, निर्वासन और वापसी की लंबी यात्रा की भी है।
कौन हैं तारिक रहमान? जानें 4 साल की उम्र में जेल जाने से लेकर बांग्लादेश PM तक पहुंचने की कहानी
कभी जिस देश से उन्हें दूर रहना पड़ा, अब उसी देश की बागडोर उनके हाथों में आने जा रही है। यह कहानी सिर्फ एक राजनीतिक उत्तराधिकारी की नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव, विवाद, निर्वासन और वापसी की लंबी यात्रा की भी है।
By : Editorial Team
Update: 2026-02-13 10:23 GMT
राजनीतिक विरासत में जन्म
तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में तारिक जिया के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 1967 में हुआ था, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा था। वे देश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान, जब बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चल रहा था, तब तारिक महज चार वर्ष के थे। बीएनपी के अनुसार, उस दौर में उन्हें अन्य सैन्य अधिकारियों के परिवारों के साथ कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया था। पार्टी अक्सर उन्हें “मुक्ति संग्राम के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल” बताकर उनकी राजनीतिक पहचान को ऐतिहासिक संघर्ष से जोड़ती रही है।
“बेगमों की लड़ाई” की पृष्ठभूमि
1975 में बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद देश की राजनीति में उथल-पुथल का दौर शुरू हुआ। उसी राजनीतिक परिदृश्य में जियाउर रहमान ने सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत की। इस घटना के बाद जिया परिवार और शेख हसीना के परिवार के बीच गहरा राजनीतिक टकराव पैदा हुआ, जिसे बांग्लादेश की राजनीति में “बेगमों की लड़ाई” कहा जाता है। दशकों तक खालिदा जिया और शेख हसीना देश की राजनीति के दो ध्रुव बने रहे। हालिया चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहली बार इन दोनों में से कोई भी चुनावी मैदान में मौजूद नहीं था—खालिदा जिया का हाल ही में निधन हो चुका है और शेख हसीना राजनीतिक परिस्थितियों के चलते देश से बाहर हैं।
पिता की हत्या और राजनीतिक परवरिश
जियाउर रहमान की हत्या उस समय हुई जब तारिक मात्र 15 वर्ष के थे। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मां खालिदा जिया के साये में हुआ। आगे चलकर खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। तारिक की प्रारंभिक शिक्षा के बारे में सीमित जानकारी उपलब्ध है। बीएनपी के अनुसार उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की, हालांकि चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता उच्च माध्यमिक (12वीं) बताई है।
सक्रिय राजनीति में एंट्री
बीएनपी के मुताबिक, तारिक रहमान ने 1980 के दशक के अंत में सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया। 1988 में वे औपचारिक रूप से पार्टी से जुड़े। 1991 के संसदीय चुनाव के दौरान, जब खालिदा जिया ने पांच सीटों से चुनाव लड़ा, तो उनके चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी तारिक के पास थी। लेकिन 2001 का चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस चुनाव में बीएनपी-नेतृत्व वाले गठबंधन को दो-तिहाई बहुमत मिला और पार्टी के भीतर तारिक की भूमिका मजबूत होती गई। 2002 में उन्हें वरिष्ठ संयुक्त महासचिव बनाया गया और 2009 में पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। विश्लेषकों के अनुसार, यह उनके राजनीतिक करियर की निर्णायक छलांग थी।
‘हवा भवन’ और भ्रष्टाचार के आरोप
2001-06 के बीएनपी शासनकाल में ढाका स्थित बनानी कार्यालय जिसे ‘हवा भवन’ कहा जाता था काफी विवादों में रहा। आरोप लगे कि यह कार्यालय सत्ता का समानांतर केंद्र बन गया था और तारिक रहमान इसके प्रमुख संचालक थे। उन पर और उनके सहयोगियों पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, जिन्हें बीएनपी ने हमेशा राजनीतिक साजिश बताया। 2004 में शेख हसीना की रैली में हुए ग्रेनेड हमले के मामले में भी तारिक रहमान को अभियुक्त बनाया गया और बाद में उनकी अनुपस्थिति में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अवामी लीग ने उन्हें इस साजिश का हिस्सा बताया, जबकि बीएनपी ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया।
गिरफ्तारी, निर्वासन और लंदन प्रवास
2007 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने जेल में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। 2008 में रिहा होने के बाद वे इलाज के लिए लंदन चले गए और वहीं रहने लगे। इसके बाद करीब 17 वर्षों तक वे लंदन में निर्वासन जैसी स्थिति में रहे। इस दौरान 2008 में शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद बीएनपी के कई नेताओं पर कानूनी कार्रवाई हुई। 2018 में 2004 हमले के मामले में तारिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लंदन में रहते हुए उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर पार्टी का नेतृत्व संभाला, खासकर तब जब 2018 में खालिदा जिया को भ्रष्टाचार मामले में सजा हुई।
वापसी और नेतृत्व संभालना
राजनीतिक हालात में बदलाव और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद परिस्थितियां बदलीं। खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ने पर तारिक 26 दिसंबर को ढाका लौटे। 18 महीने जेल और 17 साल लंदन में बिताने के बाद उनकी यह वापसी प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण थी। 30 दिसंबर को खालिदा जिया का निधन हो गया और 9 जनवरी को बीएनपी की राष्ट्रीय स्थायी समिति ने औपचारिक रूप से तारिक रहमान को पार्टी अध्यक्ष चुन लिया।
चुनावी जीत और सत्ता की तैयारी
13वें आम चुनाव में बीएनपी को दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिला। इस जीत ने तारिक रहमान को देश का निर्विवाद राजनीतिक नेता बना दिया है। उन्होंने अपने अभियान में स्थिरता, आर्थिक सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली को प्रमुख मुद्दा बनाया। निर्वासन से लौटकर उन्होंने खुद को केवल विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक सक्रिय और प्रभावी नेता के रूप में प्रस्तुत किया।
चुनौतियां कम नहीं
हालांकि सत्ता की राह खुल चुकी है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। आर्थिक सुधार, राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित कूटनीति बनाए रखना उनकी प्राथमिकताओं में होगा। साथ ही, उनके खिलाफ पूर्व में लगे आरोप और विवाद भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने रह सकते हैं।
प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता के शिखर पर
तारिक रहमान की कहानी बांग्लादेश की राजनीति के उतार-चढ़ाव का प्रतिबिंब है, एक ऐसे नेता की, जिसने बचपन में हिरासत देखी, युवावस्था में राजनीतिक विरासत संभाली, विवादों और सजा का सामना किया, 17 साल तक देश से दूर रहा और अंततः प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता के शिखर पर पहुंचा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या वह अपनी इस ऐतिहासिक जीत को स्थिर शासन और दीर्घकालिक राजनीतिक स्थिरता में बदल पाते हैं।