भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में बदलाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकी दालों को सूची से हटाया, जानें क्या है इसके मायने

व्हाइट हाउस की ओर से जारी पहले तथ्य पत्र में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ खाद्य व कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। सूची में सूखे अनाज, लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, फल और नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे।

Update: 2026-02-11 06:54 GMT
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी प्रारंभिक तथ्य पत्र (फैक्ट शीट) में जिन वस्तुओं पर भारत द्वारा आयात शुल्क कम या समाप्त करने की बात कही गई थी, उसमें कुछ दालों को भी शामिल बताया गया था। हालांकि अब संशोधित तथ्य पत्र में दालों का उल्लेख हटा दिया गया है। इस संशोधन के बाद यह स्पष्ट नहीं रह गया है कि भारत अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क में कोई कटौती करेगा या नहीं। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के व्यापारिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

क्या था पहले जारी तथ्य पत्र में?

व्हाइट हाउस की ओर से जारी पहले तथ्य पत्र में कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ खाद्य व कृषि वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। सूची में सूखे अनाज, लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, फल और नट्स, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, शराब और वाइन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए थे। इस सूची में दालों का उल्लेख खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उपभोक्ता देशों में से एक है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में आयात भी करता है। ऐसे में अमेरिकी दालों पर शुल्क में कमी अमेरिका के लिए बड़ा निर्यात अवसर बन सकती थी।

संशोधित दस्तावेज में क्या बदला?

अब व्हाइट हाउस ने अपने पहले जारी किए गए तथ्य पत्र को संशोधित कर दिया है। नए संस्करण में दालों का जिक्र हटा दिया गया है। हालांकि अन्य कृषि और औद्योगिक उत्पादों का उल्लेख यथावत है। इस बदलाव का अर्थ यह है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क में कोई कटौती करेगा या नहीं। इस मुद्दे पर न तो भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही व्हाइट हाउस ने दालों को हटाने के कारणों पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।

पूरा मामला सरल शब्दों में

भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति जताई है। अमेरिका चाहता है कि भारत उसके उत्पादों पर आयात शुल्क कम करे, ताकि अमेरिकी सामान भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सके। प्रारंभिक तथ्य पत्र में दालों को भी इस संभावित शुल्क कटौती की सूची में शामिल बताया गया था। अब संशोधित दस्तावेज से दालों का उल्लेख हटा दिया गया है। इससे यह स्थिति बन गई है कि अमेरिकी दालों पर भारत की टैरिफ नीति अभी स्पष्ट नहीं है।

क्यों महत्वपूर्ण है दालों का मुद्दा?

भारत दालों का एक बड़ा उपभोक्ता है। देश में अरहर, मसूर, चना और अन्य दालों का उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए समय-समय पर आयात की जरूरत पड़ती है। भारत अमेरिका सहित कनाडा और अन्य देशों से भी दालें आयात करता है। यदि अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क में कमी होती, तो अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में कीमत के लिहाज से लाभ मिल सकता था। इससे भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती और संभवतः कीमतों पर भी असर पड़ता। हालांकि दालें भारतीय किसानों के लिए संवेदनशील कृषि उत्पाद मानी जाती हैं। आयात शुल्क में कटौती से घरेलू उत्पादकों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इस विषय पर नीति-निर्माताओं को संतुलन साधना होता है, एक ओर अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध और दूसरी ओर घरेलू कृषि हित।

व्यापार संतुलन और अमेरिकी दबाव

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। अमेरिका अक्सर यह कहता रहा है कि भारत कई कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर ऊंचे आयात शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा में कठिनाई होती है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी। अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पाद—विशेष रूप से अनाज, मेवे, तेल और शराब—भारत में कम शुल्क के साथ प्रवेश कर सकें। दालों को प्रारंभिक सूची में शामिल किए जाने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था। लेकिन अब उनके हटने से संकेत मिलता है कि इस विषय पर बातचीत अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंची है।

भारत की संभावित रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कृषि क्षेत्र को लेकर विशेष सावधानी बरतता है। दालें और अन्य खाद्य उत्पाद सीधे किसानों और उपभोक्ताओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी भी शुल्क कटौती का फैसला घरेलू बाजार, उत्पादन और कीमतों को ध्यान में रखकर ही लिया जाता है। संभव है कि दालों को लेकर अभी दोनों देशों के बीच और चर्चा होनी बाकी हो। यह भी संभव है कि अंतिम समझौते में इस मुद्दे को अलग से शामिल किया जाए या कुछ शर्तों के साथ जोड़ा जाए।

आयात शुल्क में कटौती को लेकर अनिश्चितता

व्हाइट हाउस के संशोधित तथ्य पत्र के बाद अब निगाहें भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश इस विषय पर स्पष्टीकरण जारी करते हैं या इसे आगामी चरण की वार्ता में सुलझाया जाएगा। अंतरिम समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और शुल्क बाधाओं को कम करना है। लेकिन दालों जैसे संवेदनशील उत्पादों पर अंतिम निर्णय दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिकी दालों पर भारतीय आयात शुल्क में संभावित कटौती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और स्पष्टता आने की संभावना है, क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में यह मुद्दा एक अहम कड़ी बन सकता है।

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