पत्रकार को पीटने पर मानवाधिकार संगठनों ने कार्रवाई की उठाई मांग: बांग्लादेश
पेरिस, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पुलिसकर्मियों द्वारा एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है।;
पेरिस, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पुलिसकर्मियों द्वारा एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ कर्मियों ने पुलिस वैन में ले जाकर पत्रकार की पिटाई की। इस मुद्दे को मानवाधिकार संगठन ने प्रेस की आजादी पर हमला करार दिया है।
कथित तौर पर पत्रकार ने पुलिसकर्मियों को एक महिला के साथ मारपीट करते हुए देखा और घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन पुलिस वैन में ले जाकर पीटा। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से जेएमबीएफ ने बताया, " यह घटना इसी महीने ढाका के बिजॉय सरानी चौराहे पर हुई। ग्लोबल टेलीविजन के पत्रकार बुलबुल हुसैन वहां इस्लामी छात्र शिबिर और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की कवरेज के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों को एक महिला के साथ मारपीट करते देखा।"
बांग्लादेशी दैनिक ढाका ट्रिब्युन से बातचीत में बुलबुल ने बताया कि उन्होंने पत्रकारिता के दायित्व के तहत घटना को कैमरे में रिकॉर्ड करना शुरू किया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे वीडियो डिलीट करने को कहा। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया और खुद को पत्रकार बताया, तो पुलिसकर्मी उन्हें कथित तौर पर जबरन पुलिस वैन के अंदर ले गए और उनके साथ मारपीट की।
बुलबुल ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के आयुक्त को लिखित शिकायत देकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उनके सिर पर कई बार प्रहार किया, उन्हें वैन के फर्श पर गिरा दिया और इसके बाद भी मारपीट जारी रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनकी छाती पर अपना बूट रखकर उनका दम घोंटने की कोशिश की।
मारपीट में घायल बुलबुल को बाद में ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने पाया कि उनके सिर, आंख और छाती पर चोट आई है।
जेएमबीएफ ने कहा कि किसी पत्रकार द्वारा कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के आचरण को रिकॉर्ड करने के कारण उसके साथ मारपीट किया जाना प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही और जनता के सूचना के अधिकार के लिए गंभीर खतरा है। संगठन ने पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर महिला के साथ की गई मारपीट की भी स्वतंत्र जांच की मांग की।
मानवाधिकार संगठन ने कहा, "यह घटना बांग्लादेश के संविधान और देश के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के तहत गंभीर सवाल खड़े करती है। हमारी सरकार और संबंधित कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से बुलबुल की शिकायत की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की अपील की है।"
जेएमबीएफ ने कहा, " जांच में यदि किसी पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्रकारों को उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान डराने या हिंसा का सामना करने की स्थिति प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर चिंता का विषय है।"