एपस्टीन विवाद से हिली ब्रिटेन की राजनीति,पीएम कीर स्टार्मर पर बढ़ा दबाव, शबाना महमूद बन सकती हैं पहली मुस्लिम PM

स्टार्मर के करीबी सहयोगियों के इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि सरकार के भीतर अस्थिरता बढ़ रही है। मॉर्गन मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता था। 2020 में लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद से वे स्टार्मर के साथ रहे और जुलाई 2024 के आम चुनावों में पार्टी की जीत के प्रमुख सूत्रधारों में शामिल थे।

Update: 2026-02-09 18:35 GMT
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए खुलासों और पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन के नाम के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले पांच वर्षों में पांच प्रधानमंत्री देख चुके यूनाइटेड किंगडम में अब एक और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगाई जा रही हैं।

सोमवार को प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 8 फरवरी को स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने पद छोड़ दिया था। इन इस्तीफों ने राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया है। लेबर पार्टी के भीतर ही स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

इस्तीफों की श्रृंखला से बढ़ा संकट

स्टार्मर के करीबी सहयोगियों के इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि सरकार के भीतर अस्थिरता बढ़ रही है। मॉर्गन मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता था। 2020 में लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद से वे स्टार्मर के साथ रहे और जुलाई 2024 के आम चुनावों में पार्टी की जीत के प्रमुख सूत्रधारों में शामिल थे। मैकस्वीनी के हटने के बाद पार्टी सांसदों में यह संदेश गया कि शीर्ष नेतृत्व में मतभेद गंभीर हैं। टिम एलन के इस्तीफे ने इस धारणा को और मजबूत किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि बढ़ते राजनीतिक दबाव का परिणाम है।

एपस्टीन कनेक्शन और मैंडेलसन विवाद

विवाद की जड़ में पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति है। 2024 में प्रधानमंत्री स्टार्मर ने उन्हें वाशिंगटन में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था। आरोप है कि नियुक्ति के समय एपस्टीन से जुड़े उनके संबंधों की जानकारी होने के बावजूद यह फैसला लिया गया। जेफ्री एपस्टीन, जो नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में दोषी ठहराए जा चुके थे, से मैंडेलसन के पुराने संबंध सामने आए हैं। अमेरिकी दस्तावेजों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि करीब डेढ़ दशक पहले मैंडेलसन ने एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी जानकारी दी थी। हालांकि अभी तक मैंडेलसन पर औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

लेबर पार्टी के कई सांसदों का कहना है कि स्टार्मर को नियुक्ति से पहले अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। विपक्ष और पार्टी के भीतर के असंतुष्ट गुट इसे नेतृत्व की गंभीर चूक बता रहे हैं।

बंद कमरे में सांसदों को संबोधन

बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री स्टार्मर ने सोमवार को लेबर पार्टी के सांसदों को बंद कमरे में संबोधित किया। हालांकि बैठक के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए सांसदों से धैर्य रखने की अपील की। स्टार्मर ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री बने सिर्फ डेढ़ वर्ष हुआ है और इस दौरान कई बड़े नीतिगत फैसले लिए गए हैं। उन्होंने पार्टी से एकजुटता बनाए रखने का आग्रह किया। पिछले सप्ताह उन्होंने मैंडेलसन के बयानों पर भरोसा करने के लिए सार्वजनिक रूप से खेद भी जताया और संबंधित दस्तावेज जारी करने का वादा किया। सरकार का कहना है कि दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि क्या मैंडेलसन ने अधिकारियों को अपने संबंधों के बारे में गुमराह किया था या नहीं।

लेबर पार्टी में असंतोष

लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को हवा दी है। सांसदों का एक वर्ग मानता है कि पार्टी की साख को बचाने के लिए नए चेहरे की जरूरत है। हालिया सर्वेक्षणों में भी स्टार्मर की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में अब उन संभावित नेताओं के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है, जो स्टार्मर के इस्तीफा देने की स्थिति में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।

शबाना महमूद का नाम उभरा

इन नामों में सबसे प्रमुख नाम होम सेक्रेटरी शबाना महमूद का है। वे लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान सरकार में अहम भूमिका निभा रही हैं। यदि वे प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वे ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री होंगी, जो देश के राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना होगी। शबाना महमूद एक प्रवासी परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता पाक अधिकृत कश्मीर के मीरपुर क्षेत्र से ब्रिटेन आए थे। प्रवासी पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्होंने इमिग्रेशन के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। होम सेक्रेटरी के रूप में उन्होंने अनधिकृत आव्रजन के खिलाफ कड़े कदम उठाए, बॉर्डर कंट्रोल को मजबूत किया और स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) के लिए आवश्यक अवधि को पांच से बढ़ाकर दस वर्ष करने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया। यही कारण है कि लेबर पार्टी के दक्षिणपंथी गुटों में भी उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। इससे पहले न्याय मंत्री के रूप में उन्होंने जेल सुधार, सजा प्रणाली और मानवाधिकार मामलों पर काम किया। वे मार्गरेट थैचर और बेनजीर भुट्टो को अपनी प्रेरणा मानती हैं।

नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल स्टार्मर को हटाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है, लेकिन यदि असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो पार्टी के भीतर नेतृत्व चुनौती दी जा सकती है। ब्रिटेन की राजनीति पिछले कुछ वर्षों से अस्थिर रही है। कंजर्वेटिव और लेबर दोनों दलों में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। ऐसे में यदि स्टार्मर को पद छोड़ना पड़ता है तो यह पांच वर्षों में छठा प्रधानमंत्री परिवर्तन होगा। हालांकि स्टार्मर के समर्थक मानते हैं कि संकट अस्थायी है और दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उनका तर्क है कि जब तक कोई औपचारिक आरोप सिद्ध नहीं होते, तब तक नेतृत्व परिवर्तन की मांग जल्दबाजी होगी।

नेतृत्व परिवर्तन का सामना


एपस्टीन फाइल्स और मैंडेलसन विवाद ने ब्रिटिश राजनीति को संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। एक ओर सरकार अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और पार्टी के भीतर के असंतुष्ट गुट दबाव बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक परिदृश्य किस दिशा में जाता है। यदि स्टार्मर स्थिति संभालने में सफल रहते हैं तो वे अपने कार्यकाल को स्थिर कर सकते हैं। लेकिन यदि असंतोष और गहराता है, तो ब्रिटेन को एक और नेतृत्व परिवर्तन का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, पूरे देश की नजरें लेबर पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, जहां राजनीतिक भविष्य का फैसला पार्टी की आंतरिक एकजुटता और आगामी खुलासों पर निर्भर करेगा।

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