लंदन : कभी जिस ब्रिटिश साम्राज्य के बारे में कहा जाता था कि उसमें सूरज नहीं डूबता, आज उसी यूनाइटेड किंगडम (UK) की एकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) से अलग होने के बाद ब्रिटेन के भीतर क्षेत्रीय स्वायत्तता और अलग पहचान की मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। इसी बीच वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं की ओर से उठाया गया एक संयुक्त कदम ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। तीनों क्षेत्रों के शीर्ष मंत्रियों ने सोमवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में ब्रिटेन की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया है। नेताओं ने प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और उनकी सरकार से भविष्य में होने वाले संवैधानिक बदलावों के लिए तैयार रहने को कहा है। समझौते में यह भी संकेत दिया गया है कि इन क्षेत्रों के लिए यूरोपीय संघ के साथ करीबी संबंध महत्वपूर्ण हैं।
समझौते में वेस्टमिंस्टर को दिया गया स्पष्ट संदेश
तीनों नेताओं के संयुक्त समझौते में ब्रिटिश संसद का जिक्र करते हुए कहा गया कि इन द्वीपों और दुनिया भर में इसे देख रहे लोगों के लिए इससे स्पष्ट संकेत नहीं हो सकता कि वेस्टमिंस्टर का समय अब खत्म हो रहा है। इस बयान को ब्रिटेन की मौजूदा केंद्रीय राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यह पहली बार बताया जा रहा है जब वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं ने इस तरह एक साथ आकर ब्रिटेन की संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत को लेकर आवाज उठाई है। हालांकि, इस समझौते का अर्थ तत्काल ब्रिटेन से अलग होने की घोषणा नहीं है। इसके बावजूद इसने यूनाइटेड किंगडम के भविष्य और उसके घटक क्षेत्रों के अधिकारों को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।
ट्रंप की टिप्पणी के बाद बढ़ी चर्चा
तीनों क्षेत्रों के नेताओं का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी के बाद सामने आया है। ट्रंप ने आयरलैंड की यात्रा के दौरान आयरलैंड और ब्रिटेन के उत्तरी आयरलैंड के एकीकरण को लेकर अपनी राय जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि एकीकृत आयरलैंड शानदार होगा। उत्तरी आयरलैंड को लेकर ब्रिटेन और आयरलैंड के बीच संवैधानिक स्थिति लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रही है। ऐसे में ट्रंप की टिप्पणी के बाद इस विषय पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई।
ब्रिटिश सरकार ने खारिज की टूटने की आशंका
हालांकि ब्रिटिश सरकार ने इस घटनाक्रम को यूनाइटेड किंगडम के तत्काल टूटने के संकेत के रूप में देखने से इनकार किया है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ब्रिटेन की एकजुटता में दृढ़ विश्वास रखते हैं। सरकार का जोर फिलहाल लोगों के जीवन-यापन की लागत कम करने और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर है। प्रवक्ता टाम वेल्स ने कहा कि ब्रिटेन तब सबसे बेहतर स्थिति में होता है, जब उसके लोग बंटने के बजाय साझा मूल्यों और समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर काम करते हैं।
1921 में आयरलैंड के विभाजन के बाद बदला नक्शा
ब्रिटेन की मौजूदा संवैधानिक संरचना का इतिहास काफी पुराना है। 1921 में आयरलैंड को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली थी, जबकि उत्तरी आयरलैंड यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा बना रहा। इसके बाद से उत्तरी आयरलैंड में ब्रिटेन के साथ बने रहने और आयरलैंड के साथ एकीकरण, दोनों पक्षों की राजनीतिक मांगें मौजूद रही हैं। वेल्स और स्कॉटलैंड भी यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा हैं, हालांकि दोनों को अलग-अलग स्तर की स्वायत्त शक्तियां हासिल हैं। हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक और संवैधानिक पहचान को लेकर बहस लगातार बनी हुई है।
2014 में स्कॉटलैंड ने कराया था जनमत संग्रह
स्कॉटलैंड में ब्रिटेन से अलग होने को लेकर 2014 में जनमत संग्रह कराया गया था। इसमें करीब 55 प्रतिशत मतदाताओं ने यूनाइटेड किंगडम में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था, जबकि करीब 45 प्रतिशत ने स्वतंत्रता का समर्थन किया था। इसके दो साल बाद 2016 में ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने को लेकर जनमत संग्रह हुआ। इसके बाद ब्रिटेन ने जनवरी 2020 में औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ छोड़ दिया। अब वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के नेताओं के ताजा संयुक्त कदम ने ब्रिटेन की एकता, स्वायत्तता और यूरोप के साथ उसके भविष्य के रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।