इस्लामाबाद/नई दिल्ली: आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों का सामना करता रहा पाकिस्तान अब एक बार फिर चर्चा में है। अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की प्लीनरी बैठक से पहले पाकिस्तान की राष्ट्रीय जांच एजेंसी FIA ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की अपनी नई रेड बुक जारी की है। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का नाम भी शामिल है। एजेंसी ने अजहर की गिरफ्तारी में मदद के लिए घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है। मसूद अजहर पर पहले 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित था। अब इसमें 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अजहर इस समय कहां मौजूद है और उसे पकड़ने के लिए जमीन पर क्या कार्रवाई की जा रही है।
FATF बैठक से पहले कार्रवाई ने बढ़ाई चर्चा
पाकिस्तान के लिए FATF की अक्टूबर में प्रस्तावित प्लीनरी बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। उस दौरान पाकिस्तान पर आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। ऐसे में अब मसूद अजहर जैसे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल व्यक्ति के खिलाफ इनाम बढ़ाने की घोषणा को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि केवल इनाम की राशि बढ़ाए जाने को किसी आतंकी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि पाकिस्तान के इस कदम पर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह वास्तविक गिरफ्तारी प्रयास का हिस्सा है या अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कार्रवाई दिखाने की कोशिश।
2021 में भी पाकिस्तान ने किया था दावा
मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का रुख पहले भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2021 में पाकिस्तान ने दावा किया था कि अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान चला गया है। उसी दौरान FIA ने अपनी रेड बुक में उसे भगोड़ा घोषित करते हुए उस पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा था। अब करीब पांच साल बाद इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गई है। लेकिन पाकिस्तान ने यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि उसे अजहर के वर्तमान ठिकाने के बारे में कोई नई जानकारी मिली है या नहीं।
भारत के खिलाफ कई आतंकी मामलों में नाम
मसूद अजहर भारत के लिए लंबे समय से वांटेड आतंकियों में शामिल रहा है। वह जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है। जैश-ए-मोहम्मद को भारत के अलावा अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत कई स्तरों पर आतंकी संगठन के रूप में प्रतिबंधित किया गया है। मसूद अजहर का नाम भारत में कई आतंकवादी घटनाओं और मामलों से जुड़ा रहा है। वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत ने अजहर को जेल से रिहा किया था। इसके बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया और संगठन भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए लगातार चर्चा में रहा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर चर्चा में आया अजहर
मसूद अजहर का नाम हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान तनाव के संदर्भ में भी सामने आता रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई से जुड़े विवरणों में बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने का भी उल्लेख हुआ था। ऐसे समय में जब FATF की अगली प्लीनरी बैठक नजदीक है, पाकिस्तान द्वारा अजहर पर घोषित इनाम में बढ़ोतरी को रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घोषणा से यह साबित नहीं होता कि पाकिस्तान ने अजहर को गिरफ्तार करने के लिए कोई नई ठोस कार्रवाई शुरू की है।
अब निगाहें पाकिस्तान के अगले कदम पर
मसूद अजहर के खिलाफ इनाम बढ़ाने की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान आगे क्या करता है। FATF जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल घोषणाओं के बजाय आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई पर जोर दिया जाता है। ऐसे में अक्टूबर की प्लीनरी से पहले पाकिस्तान के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस तरह समीक्षा होती है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है तो उसके ठोस नतीजे भी सामने आने की उम्मीद रहेगी।