बाब अल-मंदेब पर हूतियों का बढ़ता दबदबा, सऊदी अरब ने इजराइल से मांगी मदद; क्या वैश्विक तेल सप्लाई पर मंडरा रहा बड़ा खतरा?

बाब अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्यसागर तक पहुंचते हैं। यूरोप और एशिया के बीच सामान ले जाने वाले कार्गो जहाजों के अलावा तेल और LNG टैंकर भी इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।;

Update: 2026-09-14 09:34 GMT

रियाद/यरूशलम: यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती समुद्री ताकत ने पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों को बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत करने से रोकने के लिए मध्य पूर्व के देशों से मदद मांगी है। इजराइली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने इजराइल से भी अप्रत्यक्ष रूप से सहायता की अपील की है। बताया गया है कि इजराइल से अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के माध्यम से संपर्क किया गया और खुफिया जानकारी समेत दूसरी तरह की मदद मांगी गई। सऊदी नेतृत्व की चिंता यह है कि अगर हूती बाब अल-मंदेब को प्रभावी रूप से बंद करने में सफल होते हैं, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

क्यों अहम है बाब अल-मंदेब स्ट्रेट?

बाब अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्यसागर तक पहुंचते हैं। यूरोप और एशिया के बीच सामान ले जाने वाले कार्गो जहाजों के अलावा तेल और LNG टैंकर भी इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इस जलमार्ग में किसी भी तरह की लंबे समय तक रुकावट वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है। जहाजों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में अफ्रीका के दक्षिणी सिरे यानी केप ऑफ गुड होप के आसपास से गुजरना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय, ईंधन खर्च और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।

दो अहम द्वीपों पर हूतियों का कब्जा

यमन सरकार के मुताबिक, हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर भी अपने लड़ाके तैनात किए हैं। ये द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। इससे पहले हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तट पर स्थित मोखा बंदरगाह और मायून द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल किया था। इन क्षेत्रों पर पहले सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना का नियंत्रण था। रणनीतिक रूप से इन इलाकों की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनसे लाल सागर के समुद्री रास्तों पर नजर रखने और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर दबाव बनाने की क्षमता बढ़ सकती है।

तेल और गैस की सप्लाई पर सीधा असर

बाब अल-मंदेब की अहमियत सिर्फ कंटेनर शिपिंग तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र से यूरोप और एशिया की ओर जाने वाले ऊर्जा कार्गो के लिए भी यह महत्वपूर्ण रास्ता है। UAE से जुड़े तेल टैंकर और सऊदी अरब से लाल सागर के बंदरगाहों के जरिए पूर्वी बाजारों की ओर जाने वाले टैंकर इस समुद्री नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। सऊदी अरब अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों और रिफाइनरियों से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल यानबू जैसे लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाता है। अगर बाब अल-मंदेब में आवाजाही बाधित होती है, तो इन जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत और डिलीवरी का समय दोनों बढ़ेंगे।

सऊदी अरब ने क्यों मांगी क्षेत्रीय मदद?

मोहम्मद बिन सलमान की अपील का मुख्य संदेश यह है कि बाब अल-मंदेब का संकट केवल सऊदी अरब या यमन तक सीमित नहीं है। सऊदी नेतृत्व का आकलन है कि स्ट्रेट के बंद होने से पूरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मिस्र के लिए भी यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है। स्वेज नहर देश की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। यदि लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बड़े पैमाने पर प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर स्वेज नहर से होने वाले राजस्व पर पड़ सकता है। इसी वजह से मिस्र भी इस स्थिति को लेकर चिंतित बताया जा रहा है।

अमेरिका सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका फिलहाल सऊदी अरब को सीधे बड़े पैमाने पर सैन्य समर्थन देने को लेकर सावधानी बरत रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को स्थिति का आकलन करने के लिए सऊदी अरब भेजे जाने की बात सामने आई है। सऊदी अरब में पहले से अमेरिकी सैन्यकर्मी मौजूद हैं, जो क्षेत्रीय इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल गतिविधियों में समन्वय करते हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमेरिका को व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में सीधे शामिल होने से कैसे रोका जाए।

एयर स्ट्राइक की भी चर्चा

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका बाब अल-मंदेब के आसपास हूतियों के कब्जे वाले कुछ रणनीतिक ठिकानों पर संभावित एयर स्ट्राइक पर विचार कर सकता है। खासकर ऐसी स्थिति में जब वहां रडार या मिसाइल लॉन्चर तैनात किए जाने की पुष्टि होती है। हूतियों ने नवंबर 2023 से लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था। उनका कहना था कि ये हमले गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में किए जा रहे हैं। इसके जवाब में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने हूती ठिकानों पर कई सैन्य हमले किए।

अब द्वीपों और रणनीतिक तटीय इलाकों पर हूतियों की बढ़ती मौजूदगी ने इस पुराने संघर्ष को एक नए समुद्री मोर्चे में बदल दिया है। अगर बाब अल-मंदेब में लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक सप्लाई चेन तक देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि सऊदी अरब अब इसे सिर्फ अपनी सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ा संकट मानकर दूसरे देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

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