ईरान को चीन से मिलीं अमेरिकी एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें? 3 US सैनिकों की मौत से जुड़ा लिंक

17 जुलाई को मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर बेस को तीन बार निशाना बनाया गया। हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल हुए।;

Update: 2026-09-14 06:01 GMT

वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच चीन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि चीन से जुड़े संस्थानों ने ईरान को जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरफोर्स बेस की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराई थीं। ये तस्वीरें 17 जुलाई को हुए ईरानी मिसाइल हमले से पहले और बाद की बताई जा रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन तस्वीरों और जॉर्डन के मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर हुए हमले के बीच संबंध के संकेत मिले हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।

अमेरिकी सैनिकों की मौत से जुड़ा मामला

17 जुलाई को मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर बेस को तीन बार निशाना बनाया गया। हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल हुए। मारे गए अमेरिकी सैनिकों में 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान, 19 वर्षीय प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस और 28 वर्षीय सार्जेंट एंजेल एस. रामपर्साड शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मिसाइलें उस हिस्से में गिरीं जहां अमेरिकी सैनिक आराम कर रहे थे। ईरान ने एयरबेस पर मौजूद विमानों को भी निशाना बनाया था।

अमेरिका ने चीन पर सीधे नहीं लगाया हमले का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन से मिली सैटेलाइट जानकारी ने ईरान को हमले की तैयारी में मदद की हो सकती है। हालांकि, अमेरिका ने चीन की सरकार पर सीधे तौर पर अमेरिकी सैनिकों की हत्या या हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया है। अगर सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने की बात की पुष्टि होती है तो इससे अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित बैठक पर भी दुनिया की नजर है।

चीन ने आरोपों को किया खारिज

अमेरिकी अधिकारियों ने इस मुद्दे को चीन के अधिकारियों के सामने उठाया है। इसके जवाब में चीन ने आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से सबूत पेश करने को कहा है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि चीन और ईरान के बीच सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है। उन्होंने चीन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की आलोचना की। हालांकि, प्रवक्ता ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या चीन से जुड़े संस्थानों ने 17 जुलाई के हमले से संबंधित सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध कराई थीं।

पहले भी चीनी सैटेलाइट को लेकर उठे थे सवाल

ईरान की सैटेलाइट क्षमताओं को लेकर इससे पहले भी रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं। अप्रैल में ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान चीन में बने एक जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल कर रहा है। इसके बाद मई में अमेरिका ने चीन में स्थित तीन सैटेलाइट कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। 10 सितंबर को ईरान ने एक बार फिर मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस को निशाना बनाया। कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन दावों से इनकार किया। ऐसे में सैटेलाइट तस्वीरों को लेकर सामने आया नया विवाद पश्चिम एशिया के साथ-साथ अमेरिका-चीन संबंधों के लिए भी अहम माना जा रहा है।

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