आयशा वहाब बनीं अमेरिकी कांग्रेस की पहली अफगान-अमेरिकी सदस्य, मुश्किल बचपन से संसद तक तय किया लंबा सफर

आयशा वहाब का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनका जन्म न्यूयॉर्क के क्वींस में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। उनके पिता की हत्या कर दी गई थी और कुछ समय बाद उनकी मां का भी निधन हो गया। माता-पिता की मौत के बाद कैलिफोर्निया के बे एरिया में रहने वाले एक दंपति ने उन्हें गोद लिया।;

Update: 2026-08-22 08:02 GMT

वॉशिंगटन: कैलिफोर्निया के एक विशेष चुनाव में 39 वर्षीय प्रोग्रेसिव डेमोक्रेट आयशा वहाब ने बड़ी जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। 21 अगस्त को हुए चुनाव में उन्होंने अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार मेलिसा हर्नांडेज को 53.1 प्रतिशत वोट के साथ हराया। इस जीत के साथ आयशा अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली अफगान-अमेरिकी सदस्य बन गई हैं। आयशा को जिस सीट पर जीत मिली है, वह पूर्व कांग्रेसी एरिक स्वैलवेल की थी। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई थी। आयशा फिलहाल जनवरी तक इस पद पर रहेंगी। हालांकि कार्यकाल छोटा है, लेकिन उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व के रूप में देखा जा रहा है।

बेहद मुश्किल रहा आयशा का बचपन

आयशा वहाब का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनका जन्म न्यूयॉर्क के क्वींस में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। उनके पिता की हत्या कर दी गई थी और कुछ समय बाद उनकी मां का भी निधन हो गया। माता-पिता की मौत के बाद कैलिफोर्निया के बे एरिया में रहने वाले एक दंपति ने उन्हें गोद लिया। यहीं से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। आयशा ने शिक्षा पर जोर दिया और आगे चलकर पॉलिटिकल साइंस में डिग्री, इसके बाद MBA और सोशल वर्क में डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की।

2011 में परिवार पर आया आर्थिक संकट

आयशा की जिंदगी में एक और बड़ा संकट 2011 में आया। उस दौरान उनके परिवार का घर जब्त हो गया और आर्थिक परेशानियां बढ़ गईं। उनके माता-पिता का कारोबार बंद हो गया। इसी बीच उनके गोद लिए पिता की तबीयत खराब रहने लगी और आयशा की नौकरी भी चली गई। परिवार के लिए बे एरिया में रहना मुश्किल हो गया। इसके बाद आयशा अपने परिवार के साथ हेवर्ड चली गईं। यहीं से उनकी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता का सफर तेज हुआ। उन्होंने स्थानीय काउंसिल की बैठकों में हिस्सा लेना शुरू किया और किफायती आवास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

2018 में पहली बड़ी राजनीतिक जीत

आयशा ने 2018 में हेवर्ड सिटी काउंसिल का चुनाव जीतकर औपचारिक राजनीति में कदम मजबूत किया। स्थानीय स्तर पर काम करते हुए उन्होंने आवास, शिक्षा, आर्थिक असमानता और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2022 में उन्होंने कैलिफोर्निया की स्टेट लेजिस्लेचर का चुनाव जीता। इस जीत के साथ वह कैलिफोर्निया की स्टेट लेजिस्लेचर में पहुंचने वाली पहली अफगान-अमेरिकी और पहली मुस्लिम महिला बनीं।

प्रोग्रेसिव एजेंडे के साथ लड़ा चुनाव

आयशा वहाब खुद को प्रोग्रेसिव डेमोक्रेट के तौर पर पेश करती हैं। उनके राजनीतिक एजेंडे में सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक समानता से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने सभी के लिए मेडिकेयर, अरबपतियों पर अधिक टैक्स, छात्र ऋण माफी, मजबूत सामाजिक कल्याण योजनाओं और कॉर्पोरेट प्रभाव को सीमित करने जैसी नीतियों का समर्थन किया। उनका फोकस आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, किफायती आवास और आर्थिक अवसर बढ़ाने पर रहा है।

बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के मुद्दों पर काम

राजनीति में आने से पहले और उसके बाद भी आयशा सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। वह बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर एडवोकेसी और सामुदायिक संगठन के काम से जुड़ी रही हैं। उन्होंने किफायती आवास, नागरिक भागीदारी, शिक्षा और आर्थिक असमानता जैसे विषयों पर भी काम किया है। आयशा अलामेडा काउंटी ह्यूमन रिलेशंस कमीशन की चेयर रह चुकी हैं। इसके अलावा अफगान कोएलिशन, एबोड सर्विसेज और ट्राई-सिटी वॉलंटियर्स जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के बोर्ड में भी उनकी भूमिका रही है।

व्हाइट हाउस राउंडटेबल में भी मिली जगह

आयशा के सामाजिक और राजनीतिक काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें अफगान-अमेरिकन लीडर्स के व्हाइट हाउस राउंडटेबल में शामिल होने के लिए चुना गया था। इसके अलावा उन्होंने अलामेडा काउंटी पब्लिक हेल्थ कमिश्नर और बे एरिया विमेंस मार्च में स्पीकर के तौर पर भी काम किया है।

इतिहास रचने के बाद नई जिम्मेदारी

कैलिफोर्निया के विशेष चुनाव में जीत के साथ आयशा वहाब ने अमेरिकी राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। उनका सफर एक ऐसे बच्चे से शुरू हुआ जिसने कम उम्र में माता-पिता को खो दिया था और आर्थिक संकटों का सामना किया। इसके बाद सामाजिक कार्य, स्थानीय राजनीति और राज्य स्तर की राजनीति से होते हुए वह अब अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंची हैं। उनकी जीत न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक सफलता है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में अफगान-अमेरिकी और मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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