धनुरासन करते समय न करें ये 5 गलतियां, वरना हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली, योग में धनुरासन यानी 'बो पोज' को सबसे प्रभावी आसनों में से एक माना जाता है। यह आसन शरीर को धनुष के आकार में मोड़ता है और पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार यह पाचन सुधारने, पीठ दर्द कम करने और शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है। लेकिन अक्सर लोग इसे गलत तरीके से करते हैं, जिससे फायदे की जगह कंधे, घुटने और पीठ में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप भी धनुरासन का अभ्यास करते हैं तो इन 5 बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।;

By :  IANS
Update: 2026-10-04 05:30 GMT

नई दिल्ली, योग में धनुरासन यानी 'बो पोज' को सबसे प्रभावी आसनों में से एक माना जाता है। यह आसन शरीर को धनुष के आकार में मोड़ता है और पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार यह पाचन सुधारने, पीठ दर्द कम करने और शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है। लेकिन अक्सर लोग इसे गलत तरीके से करते हैं, जिससे फायदे की जगह कंधे, घुटने और पीठ में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप भी धनुरासन का अभ्यास करते हैं तो इन 5 बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

धनुरासन में सबसे आम गलती यह है कि लोग टखनों को ठीक से पकड़ते ही नहीं हैं। हाथों से टखनों को पकड़ते समय पकड़ ढीली होने से शरीर का बैलेंस बिगड़ जाता है और कंधों पर अनावश्यक खिंचाव आता है। हमेशा ध्यान रखें कि दोनों हाथों से टखनों को अंदर की तरफ से मजबूती से पकड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचकर रखें। कंधे और टखनों के बीच एक सीधा तनाव होना चाहिए, तभी शरीर सही धनुष की आकृति ले पाएगा।

कई लोग धनुरासन करते समय घुटनों को बहुत ज्यादा फैला देते हैं या उन्हें जमीन से ऊपर उठाने के लिए जोर लगाते हैं। इससे घुटने के लिगामेंट पर दबाव पड़ता है और दर्द शुरू हो सकता है। सही तरीका यह है कि घुटनों के बीच हिप्स के बराबर दूरी रखें। बहुत ज्यादा चौड़ा न करें। पैरों को ऊपर उठाते समय जांघों की ताकत का इस्तेमाल करें, सिर्फ घुटनों पर जोर न डालें। जिन लोगों को पहले से घुटने में दर्द है, उन्हें योग एक्सपर्ट की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए।

धनुरासन सिर्फ पीठ का आसन नहीं है, यह जांघों और कोर मसल्स का भी आसन है। अगर जांघों में सक्रियता नहीं होगी तो पूरा वजन पीठ के निचले हिस्से पर आ जाएगा। इससे कमर दर्द बढ़ सकता है। अभ्यास के दौरान जांघों को अंदर की ओर सक्रिय रखें और नितंबों को हल्का टाइट रखें। जब आप पैरों को पीछे की ओर खींचेंगे तो जांघों में हल्का खिंचाव महसूस होना चाहिए।

शरीर को ऊपर उठाते समय अक्सर लोग सिर्फ पीठ के बल पर उठने की कोशिश करते हैं। इससे पीठ में ऐंठन आ सकती है। सही तालमेल यह है कि जांघों और नितंबों की मांसपेशियां एक साथ काम करें। जब आप पैरों को पीछे धकेलते हैं तो छाती अपने आप ऊपर उठती है। जल्दबाजी में शरीर को झटके से ऊपर न उठाएं। धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से उठें।

कई लोग सांस रोककर आसन करते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी और घबराहट होने लगती है। सही तकनीक यह है कि श्वास लेते हुए शरीर को ऊपर उठाएं और श्वास छोड़ते हुए धनुरासन की अंतिम स्थिति में आएं। आसन में रहते हुए सामान्य रूप से सांस लेते रहें। 15 से 20 सेकंड रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएं।

जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया, अल्सर, गंभीर पीठ दर्द या हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ है, उन्हें धनुरासन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इससे बचना चाहिए। शुरुआत में हमेशा खाली पेट और योग मैट पर ही अभ्यास करें और किसी योग गुरु के मार्गदर्शन में करें, ताकि फायदे की जगह नुकसान न हो।

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