कोरोना मृत्यु दर कम करने को लेकर स्वास्थ्य सचिव की बैठक

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कोरोना के कारण जिन राज्यों में मौत के अधिक मामले सामने आ रहे हैं,

Update: 2020-08-08 17:49 GMT

नयी दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कोरोना के कारण जिन राज्यों में मौत के अधिक मामले सामने आ रहे हैं, उन्हें मृत्यु दर घटाने पर विशेष जोर देने के लिए कहा है और एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

श्री भूषण की अगुवाई में सात और आठ अगस्त को देश के उन 12 राज्यों के 29 जिलों के जिलाधिकारियों, जिला सर्विलांस अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों मुख्य चिकित्सीय अधिकारियों और मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिटेंडेट के साथ उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में राज्यों को यह सलाह दी गयी कि किस तरह वे कोरोना मृत्यु दर को कम करने की दिशा में काम करें और उन्हें साथ ही हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया गया। इस बैठक में संबंधित राज्यों के स्वास्थ्य सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक भी शामिल हुए।

श्री भूषण ने बैठक में कहा कि राज्य प्रयोगशालाएं की समुचित उपयोगिता पर ध्यान दें यानी अगर आरटी-पीसीआर लैब में प्रतिदिन 100 से कम और अन्य लैब में 10 से कम टेस्ट हो रहें तो उनकी संख्या बढ़ायें। इसके अलावा राज्यों को प्रति दस लाख आबादी कम टेस्ट संख्या, पिछले सप्ताह की तुलना में कम जांच, जांच की रिपोर्ट आने में होने वाली देरी और अधिक संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों के कोरोना संक्रिमत होने जैसे मुद्दों पर ध्यान देने को कहा गया।

आज हुई बैठक में आठ राज्यों के 13 जिले के अधिकारियों से चर्चा हुई। इसमें असम के कामरूप , बिहार के पटना, रांची के झारखंड, केरल के अलपुझा और तिरुवनंतपुरम, ओडिशा के गंजम, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना, हुगली, हावड़ा, कोलकाता और मालदा के अधिकारी शामिल हुए। ये वे राज्य और जिले हैं, जहां की कोरोना मृत्यु दर राष्ट्रीय कोरोना मृत्यु दर 2.04 प्रतिशत से अधिक है।

इन जिलों में देश के कुल सक्रिय मामलों का नौ फीसदी और कोरोना के कारण होने वाली मौत के 14 फीसदी मामले हैं। इनमें प्रति दस लाख आबादी कोरोना की जांच की संख्या भी कम है और यहां पोजिटिविटी दर काफी अधिक है। इनमें से उत्तर प्रदेश के लखनऊ, केरल के अलपुझा और तिरुवनंतपुरम और असम के कामरूप में हाल के दिनों में संक्रमण के नये मामले काफी अधिक सामने आ रहे हैं।

कुछ जिलों में कोरोना संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर दम तोड़ने की रिपोर्ट को देखते हुए श्री भूषण ने राज्यों को सलाह दी कि वे समय रहते कोरोना संक्रमितों को अस्पताल रेफर किया जाना तथा उनकी भर्ती सुनिश्चित करें। राज्यों को कहा गया कि वे एंबुलेंस सेव उपलब्एंध्ब कराने में किसी तरह की मनाही के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायें और एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करें। होम आइसोलेशन में रहने वाले

बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों की निगरानी के लिए प्रतिदिन स्वास्थ्यकर्मियों को प्रत्यक्ष जाकर उन्हें देखने या फोन पर परामर्श देने का निर्देश दिया गया। राज्यों को कहा गया कि वे समय पर संक्रमित की पहचान करें और स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत ढांचे को पहले से ही मजबूत करें।

श्री भूषण ने सात अगस्त को चार राज्यों के 16 जिलों के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक की थी। कल की बैठक में गुजरात के अहमदाबाद और सूरत; कर्नाटक में बेलगावी, बेंगलुरु शहरी, कलबुर्गी और उडुपी; तमिलनाडु में चेन्नई, कांचीपुरम, रानीपेट, तेनी, तिरुवल्लुर, तिरुचिरापल्ली, तूतीकोरिन और विरुधनगर तथा तेलंगाना में हैदराबाद और मेडचलमलकाजगिरी शामिल हुए थे।इन जिलों में कोविड मृत्यु दर अधिक होने के साथ ही प्रति दस लाख आबादी पर जांच की संख्या भी कम है और यहां कोविड के रोजना सामने आने वाले पुष्ट मामलों की संख्या भी ज्यादा है।

स्वास्थ्य सचिव ने इन जिलों से कहा कि वे कोरोना संक्रमिताें और अन्य लोगों विशेषकर रुग्णता, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चों के बीच होने वाली मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श, दिशानिर्देश और नैदानिक उपचार प्रोटोकॉल के अनुपालन और क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।

स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार जारी रखने के दृष्टिकोण तथा ईमानदारी से किए गए नियंत्रण और निगरानी के प्रयासों से मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलती है। इसलिए राज्यों को सलाह दी गई कि वे कोरोना लैब का उनकी क्षमता के हिसाब से अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें, प्रति दस लाख आबादी पर जांच की संख्या बढ़ाएं और समय पर उपचार तथा एंबुलेंस सेवाएं सुनिश्चित कर सक्रिय मामलों का प्रतिशत कम करें। राज्यों को अनुमानित बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता और आवश्यकता का विश्लेषण करने और समय पर योजना बनाने की सलाह दी गई। उन्हें यह बताया गया कि स्वास्थ्यकर्मियों में कोरोना संक्रमण की बेहतर रोकथाम और नियंत्रण को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि एम्स, नयी दिल्ली प्रति सप्ताह मंगलवार और शुक्रवार को वर्चुअन सत्र का आयोजन करता है, जहां एक डॉक्टरों का एक विशेषज्ञ दल कोरोना मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से आईसीयू में भर्ती मरीजों के प्रबंधन के लिए टेली या वीडियो परामर्श देता है। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ये सुनिश्चित करें कि राज्य के अस्पताल इसमें हिस्सा लें।

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