लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर सियासी संग्राम, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव टला, लेकिन सदस्यता खत्म करने पर चर्चा चाहती है भाजपा

राहुल गांधी के भाषण पर भाजपा ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान राहुल द्वारा कही गई कुछ बातों को लोकसभा की कार्यवाही से हटाने का नोटिस दिया है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में ऐसे बयान दिए जो तथ्यों से परे और आपत्तिजनक हैं।

Update: 2026-02-12 09:16 GMT
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर राजनीतिक विवाद चरम पर पहुंच गया है। संसद के भीतर दिए गए उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि, ताजा जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार फिलहाल राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने के पक्ष में नहीं है। इससे राहुल गांधी को तत्काल राहत मिलती दिख रही है, लेकिन यह मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

सरकार ने फिलहाल नहीं लिया सख्त रुख


सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस विवाद को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है और विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने से परहेज कर रही है। माना जा रहा है कि सरकार संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहती है और इस मुद्दे को और अधिक तूल देने से बचना चाहती है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के भाषण में कुछ ऐसे आरोप और टिप्पणियां थीं, जिन्हें प्रमाणित नहीं माना गया। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा अध्यक्ष कुछ आपत्तिजनक अंशों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्णय ले सकते हैं।

भाजपा ने भाषण के अंश हटाने की मांग की


राहुल गांधी के भाषण पर भाजपा ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान राहुल द्वारा कही गई कुछ बातों को लोकसभा की कार्यवाही से हटाने का नोटिस दिया है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में ऐसे बयान दिए जो तथ्यों से परे और आपत्तिजनक हैं। पार्टी का कहना है कि संसद में दिए गए वक्तव्य जिम्मेदारी और तथ्यों पर आधारित होने चाहिए, क्योंकि वे आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं।

निशिकांत दुबे ने दायर किया अलग प्रस्ताव


भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में अलग रुख अपनाते हुए राहुल गांधी के खिलाफ एक मूल प्रस्ताव दायर किया है। यह सामान्य नोटिस से अलग प्रक्रिया है। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा और मतदान हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रस्ताव पारित होने पर राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे या नहीं।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा गया पत्र


निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि राहुल गांधी के कथित ‘अनैतिक आचरण’ की जांच के लिए एक संसदीय समिति गठित की जाए। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि यदि आरोप गंभीर पाए जाते हैं तो राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी ने संसद के अंदर और बाहर ऐसे बयान दिए हैं, जो देश की एकता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को प्रभावित करते हैं।

भाषण में सैन्य संदर्भ पर आपत्ति


अपने पत्र में निशिकांत दुबे ने 11 फरवरी को दिए गए राहुल गांधी के भाषण का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित पुस्तक का संदर्भ देकर सेना, रक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। दुबे का कहना है कि किसी अप्रकाशित या अप्रमाणित सामग्री का हवाला देकर संसद में आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।

विदेश यात्राओं का मुद्दा


पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी विभिन्न मंत्रालयों पर बिना ठोस प्रमाण के आरोप लगाते रहे हैं। इसके अलावा उनकी विदेश यात्राओं और कथित फंडिंग के स्रोतों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने सदन में जो भी कहा, वह सार्वजनिक जानकारी और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है।

विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव


संसदीय प्रक्रियाओं के जानकारों का कहना है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाना एक गंभीर कदम होता है और इसके लिए पर्याप्त आधार की आवश्यकता होती है। फिलहाल सरकार द्वारा ऐसा प्रस्ताव न लाने का संकेत यह दर्शाता है कि मामला राजनीतिक स्तर पर ही सुलझाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, यदि लोकसभा अध्यक्ष आपत्तिजनक अंशों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्णय लेते हैं, तो यह भाजपा के लिए आंशिक संतोष का विषय हो सकता है। वहीं, यदि मूल प्रस्ताव पर विचार होता है, तो सदन में इस मुद्दे पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।

राजनीतिक तापमान बरकरार


राहुल गांधी के भाषण को लेकर उठे इस विवाद ने संसद का माहौल गरमा दिया है। एक ओर भाजपा इसे गंभीर आचरण का मामला बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे सकती है। फिलहाल इतना तय है कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव से राहुल गांधी को तत्काल राहत मिली है, लेकिन उनके भाषण के कुछ हिस्सों पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का रुख और सरकार का अंतिम निर्णय इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगा।

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