पंजाब में स्थिति संभाले सरकार
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने हाल ही में एक बयान दिया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने हाल ही में एक बयान दिया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है। श्री जयशंकर चीन के संदर्भ में इस बात को कह रहे थे। हालांकि गलवान प्रकरण के बाद से अब तक प्रधानमंत्री ने चीन का नाम लेकर स्पष्ट तौर पर किसी खतरे का इशारा नहीं किया है।
लेकिन उनके मंत्री अब कर रहे हैं, तो यही गनीमत है, क्योंकि खतरे को देखना और समझना, रेत में सिर गड़ाकर नजरअंदाज करने से कहीं बेहतर है। भारत को पड़ोसी देशों से ही खतरा हो, ये स्थिति किसी तौर पर आदर्श नहीं कही जा सकती। हम मजबूती का गान करते रह जाएं और हमारे अगल-बगल दुश्मन रणनीति बनाते रहें, उससे कोई फायदा नहीं होना है।
चीन के अलावा पाकिस्तान से भी भारत में घुसपैठ का खतरा हमेशा ही बना रहता है। इस वक्त पंजाब में आर्थिक, राजनैतिक हालात काफी खराब चल रहे हैं। लेकिन इस बीच पंजाब के आईजी सुकचैन सिंह गिल ने अमृतपाल सिंह को पाकिस्तान की आईएसआई से मदद मिलने का अंदेशा जतलाया है।
गौरतलब है कि वारिस पंजाब दे संगठन का मुखिया, खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह और उसके कुछ साथियों पर पिछले महीने अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए अजनाला पुलिस थाने पर हमले का आरोप है। पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह पर छह एफआईआर दर्ज की है और पिछले चार दिनों से गिरफ्तारी के लिए उसकी तलाश की जा रही है।
अमृतपाल सिंह इन पंक्तियों के लिखे जाने तक फरार ही है, जबकि उसके कुछ करीबियों को पुलिस ने पकड़ा है। पांच लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया है। कुछ लोगों को असम के डिब्रूगढ़ भी ले जाया गया है। इस बीच पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार की खिंचाई करते हुए सवाल किया कि आपके पास 80,000 पुलिसकर्मी हैं, फिर उसे कैसे गिरफ्तार नहीं किया गया। जब सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अमृतपाल को छोड़कर बा$की सभी को पकड़ लिया गया है तो, कोर्ट ने पूछा कि अमृतपाल सिंह को छोड़कर सभी को कैसे गिरफ्तार किया गया।
सरकार की ओर से इसका क्या जवाब दिया जाएगा, ये तो बाद में पता चलेगा। फिलहाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि उनकी सरकार राज्य की शांति और सद्भाव को भंग करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें कई लोगों के फोन आए जो उनकी सरकार की तारीफ कर रहे थे।
पंजाब सरकार के मुखिया आत्ममुग्धता के लिए बाद में भी वक्त निकाल सकते हैं। उनकी प्राथमिकता पहले इस सीमांत और संवेदनशील राज्य में कानून व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखना होना चाहिए। यह क्या महज संयोग ही है कि पंजाब में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, अलगाववादी ताकतें सिर उठाने लगी हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को प्रयोग न करने की सलाह दी थी। लेकिन कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के कारण पार्टी का जनाधार कमजोर हो गया और पंजाब की सत्ता कांग्रेस के हाथ से निकल गई। आप यहां पहले से अपनी ताकत बढ़ाने में लगी थी और इस बार उसे कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर सरकार बनाने का मौका मिल गया। आप ने नौकरी, शिक्षा, ईमानदार प्रशासनिक व्यवस्था जैसे वादे किए थे, लेकिन फिलहाल पंजाब की जनता को इंटरनेट बंद की सौगात मिली है। अमृतपाल सिंह की फरारी के बाद पंजाब में सुरक्षा कारणों से 3 दिन इंटरनेट बंद रहा। मंगलवार को कुछ इलाकों में इसे फिर से शुरु किया गया, लेकिन स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं है।
अमृतपाल सिंह कब तक पकड़ में आएगा, या अगर उसे वाकई पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से सहायता मिल रही है, विदेशी फंडिंग मिल रही है, तो क्या वह देश के बाहर जा चुका है। उसके मंसूबे क्या है। जिस तरह अपने बयानों में उसने पहले हिंदू राष्ट्र की मांग की तरह खालिस्तान की मांग को जायज बतलाया है, क्या वह देश के लिए बड़ा खतरा नहीं बन चुका है। और जब यह बयान उसने दिया था, तभी उस पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अमृतपाल सिंह के कुछ साथियों को पंजाब से दूर असम ले जाने का कारण क्या हो सकता है। क्या उसके फरार होने के बाद उसके संगठन से जुड़े बाकी लोग शांत बैठ जाएंगे या फिर पंजाब को फिर अस्थिर करने की कोशिशें शुरु होंगी। ये कुछ गंभीर सवाल हैं, जिस पर पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि अमृतपाल सिंह के करीबियों के पास से भारी संख्या में हथियार कहां से आए। पंजाब जैसे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था क्या लचर हो चुकी है कि किसी संगठन के लोग हथियार जमा कर लें और पुलिस को इसकी खबर बाद में लगे।
पंजाब में अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी की कोशिशों के साथ ही ब्रिटेन और अमेरिका में खालिस्तान समर्थक हरकतें देखी गईं। ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानी समर्थकों ने भारत के तिरंगे को उतारे जाने की कोशिश की, हालांकि, समय पर अधिकारियों ने पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज को बचा लिया, और खालिस्तानी झंडे को वहां से फेंक दिया। इसके बाद अमेरिका रे सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर लगे खालिस्तान के समर्थकों ने बैरिकेड्स, दरवाजे और खिड़कियां तोड़े, उन लोगों के हाथों में खालिस्तान का झंडा था। इस घटना का भी वीडियो वायरल हुआ है।
भारत से बाहर चल रहा ये घटनाक्रम बता रहा है कि देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिशें नए सिरे से शुरु हो चुकी हैं। इस बार अमृतपाल सिंह का चेहरा सामने है। पंजाब ने हिंसा और आतंकवाद का एक लंबा दौर देखा है, इतिहास के उन जख्मों को फिर से कोई कुरेदे, उससे पहले केंद्र और राज्य सरकार को ऐसी किसी भी कोशिश पर सख्ती से काबू पा लेना होगा। राजनैतिक हिसाब-किताब बाद में निपटाया जा सकता है, लेकिन देश को जोड़े रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।