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'1967 में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पूर्ववर्ती अवतार जनसंघ के रूप में पहिली बार सत्ता का स्वाद चखा था

By :  Deshbandhu
Update: 2026-03-09 20:29 GMT

'1967 में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पूर्ववर्ती अवतार जनसंघ के रूप में पहिली बार सत्ता का स्वाद चखा था। डॉ. लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद के नारे के फलस्वरूप सारे विपक्षी दल एकजुट हुए थे और अनेक प्रांतों में संविद याने संयुक्त विधायक दल की सरकारें बन गई थीं। तब जनसंघ, समाजवादी और कम्युनिस्ट सब एक साथ थे। कालांतर में जनसंघ (फिर भाजपा) ने एक-एक कर सबको ग्रस लिया।

अन्य दलों के पराभव की नींव पर भाजपा ने अपने सपनों का महल बनाया। अभी कुछ प्रेक्षकों ने गठबंधन सरकारों का दौर समाप्त हो जाने का ऐलान किया है। वस्तुस्थिति इसके परे है। जम्मू-कश्मीर से लेकर आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र तक भाजपा की गठबंधन सरकारें चल रही हैं।

पंजाब में भी गठबंधन है और उत्तर प्रदेश में भी। गोवा, मणिपुर, नगालैंड में भी यही स्थिति है। कांग्रेस का भी बिहार में गठबंधन है तथा उत्तरप्रदेश में भी। पिछला अनुभव बताता है कि भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों को कभी भी छोड़ या तोड़ सकती है।

इस परिस्थिति में गैर-भाजपाई दलों खासकर कांग्रेस, समाजवादी, साम्यवादी, रूठे कांग्रेसी- सबके सामने अच्छा मौका है कि वे एक मजबूत गठबंधन बना सकें। इसमें पहल राहुल गांधी को करना होगी।

लालू प्रसाद उनकी मदद कर सकते हैं। हमें लगता है कि उ.प्र. के परिणाम आने के बाद राहुल-अखिलेश को लखनऊ में संयुक्त प्रेस वार्ता लेकर घोषणा करना चाहिए थी कि उनका गठबंधन जारी रहेगा।'

(देशबन्धु में 16 मार्च 2017 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2017/03/blog-post_15.html

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