यूपी के श्रमिकों को बड़ा तोहफा: एक साल की सेवा पर मिलेगी ग्रेच्युटी, महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की छूट

यूपी कैबिनेट ने श्रमिकों के लिए नई सामाजिक सुरक्षा और कार्यदशा नियमावली को मंजूरी दी। एक साल की सेवा पर ग्रेच्युटी, सालाना मुफ्त हेल्थ चेकअप और महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति मिलेगी।;

Update: 2026-08-26 07:20 GMT
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्यदशा नियमावली-2026 और उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी। नई व्यवस्था के तहत पात्र श्रमिकों को अब एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा कामगारों को नियुक्ति पत्र देना और साल में कम से कम एक बार नियोक्ता के खर्च पर स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी होगा।

श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ

नई सामाजिक सुरक्षा नियमावली के तहत तय अवधि के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता अवधि तीन साल से घटाकर एक साल करने का प्रावधान किया गया है। इसका लाभ पात्र नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, असंगठित और स्व-नियोजित श्रमिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा बढ़ाने का प्रावधान भी किया गया है। रोजगार के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर पात्र श्रमिकों अथवा उनके आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

जॉइनिंग लेटर देना होगा अनिवार्य

नई नियमावली के तहत कम से कम 10 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों को नियुक्ति या जॉइनिंग लेटर देना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों के पास उनके रोजगार का आधिकारिक प्रमाण रहेगा और नौकरी से जुड़े अधिकारों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

नियोक्ताओं को श्रमिकों की साल में कम से कम एक बार निशुल्क स्वास्थ्य जांच भी करानी होगी। इसका खर्च कंपनी या प्रतिष्ठान के मालिक को उठाना होगा।

वर्कप्लेस पर सुविधाएं देना जरूरी

नई व्यवस्था में कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है। प्रतिष्ठानों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्नानघर, विश्राम कक्ष, कैंटीन और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा।

गंभीर दुर्घटना या व्यावसायिक खतरे की जानकारी संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देना भी नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी। कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय भी करने होंगे।

महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति

महिला कर्मचारियों के लिए भी नियमावली में अहम बदलाव किए गए हैं। अब महिलाओं को उनकी सहमति के आधार पर सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों और रात्रिकालीन शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि, नियोक्ता को सुरक्षित परिवहन और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने होंगे।

महिला कर्मचारियों के मातृत्व लाभ से जुड़े अधिकारों के संरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।

ठेका और प्रवासी श्रमिकों के लिए भी प्रावधान

नई व्यवस्था में ठेका श्रमिकों और अंतरराज्यीय प्रवासी कामगारों के साथ-साथ निर्माण, कारखाना, बागान, बीड़ी-सिगार और दृश्य-श्रव्य क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। पंजीकरण, रिकॉर्ड और आवश्यक विवरण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दाखिल किए जा सकेंगे।

इसके अलावा भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के लिए उपकर निर्धारण में आवासीय भवन निर्माण की लागत की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है।

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