उत्तराखंड में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, 49 संक्रमितों में 5 की मौत; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के 49 मामलों की पुष्टि हुई है और पांच संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। देहरादून में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं और स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।;

Update: 2026-08-26 06:21 GMT
देहरादून। उत्तराखंड में इंफ्लुएंजा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक 49 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि संक्रमित पांच मरीजों की मौत दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मृतकों को पहले से अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेशभर में निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया गया है।

एक अगस्त से अब तक 49 मामलों की पुष्टि

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एक अगस्त से अब तक प्रदेश में एच1एन1 के 49 मामले सामने आए हैं। इनमें 34 मरीज देहरादून जिले के हैं। राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज के अनुसार, जिन क्षेत्रों से संक्रमित मरीज मिले हैं, वहां स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाया गया है। सभी जिलों में रैपिड रिस्पॉन्स टीमें सक्रिय की गई हैं।

इन टीमों में फिजिशियन और विशेषज्ञ समेत स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं, जो संक्रमण प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। विभाग का उद्देश्य संक्रमण के मामलों की जल्द पहचान कर बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करना है।

मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्कों की जांच

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमित मरीजों की पिछले 10 से 15 दिनों की यात्रा संबंधी जानकारी भी जुटाई जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि संक्रमित व्यक्ति किन लोगों के संपर्क में आया था। संपर्क में आए लोगों की भी एच1एन1 के लिए जांच की जा रही है, ताकि संक्रमण की संभावित चेन को समय रहते रोका जा सके।

को-मॉर्बिड मरीजों पर खास नजर

स्वास्थ्य विभाग ने पहले से मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय या सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। ऐसे मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एच1एन1 संक्रमण से जिन पांच लोगों की मौत हुई, वे भी को-मॉर्बिड स्थिति में थे।

सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत कराएं जांच

विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, नाक बहना, शरीर या मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान और उल्टी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

संक्रमित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलग रखना और उसके संपर्क में आए लोगों की निगरानी करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।

अस्पतालों को जारी की गई एडवाइजरी

स्वास्थ्य विभाग ने एच1एन1 से निपटने के लिए अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय के अनुसार, विभाग संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और सभी स्तरों पर तैयारियां की गई हैं।

क्या है स्वाइन फ्लू?

स्वाइन फ्लू इंफ्लुएंजा ए वायरस के एच1एन1 सबटाइप से होने वाला संक्रामक श्वसन रोग है। संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और आंख, नाक व मुंह को बार-बार छूने से बचना उपयोगी सावधानियां हैं।

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