नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ से तबाही, कई गांव और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहे; निचले इलाकों में अलर्ट

नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से गांव, बाजार और हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है।;

Update: 2026-08-26 07:04 GMT

काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करने वाली इस नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी के आसपास के इलाकों में पानी और मलबा फैल गया। कई बाजार, गांव और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने त्रिशूली नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

आसमान साफ, फिर अचानक कैसे आई बाढ़?

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, बाढ़ का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के अनुसार, जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई थी और मौसम भी साफ था। ऐसे में अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन भी हैरान है।

प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में किसी ग्लेशियर झील के फटने, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है, या किसी अस्थायी प्राकृतिक बांध के टूटने से नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी आया होगा। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क स्थापित करने और नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान

अचानक बढ़े जलप्रवाह का सबसे ज्यादा असर भोटे कोशी नदी के किनारे मौजूद बुनियादी ढांचे पर पड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पानी का बहाव बेहद तेज था। चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ के कारण नदी किनारे स्थित बाजारों और अन्य संरचनाओं के भी प्रभावित होने की खबर है। प्रशासन ने आशंका जताई है कि बाढ़ का पानी आगे बढ़ने पर नुवाकोट और धाडिंग जिलों के निचले इलाकों में भी खतरा पैदा हो सकता है।

तिमुरे में राहत अभियान को झटका

बाढ़ और भूस्खलन के बीच तिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने की कोशिश की गई। इसी क्रम में एल्टीट्यूड एयर का एक हेलीकॉप्टर भी वहां भेजा गया, लेकिन सुरक्षित लैंडिंग की जगह नहीं मिलने के कारण उसे काठमांडू लौटना पड़ा।

पायलट के मुताबिक, तेज बाढ़ के कारण तिमुरे का स्थानीय हेलीपैड बह गया है। हवाई निरीक्षण के दौरान गांव का बड़ा हिस्सा पानी और मलबे से ढका नजर आया। इससे प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

निचले इलाकों में बढ़ा खतरा

भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। स्थानीय प्रशासन संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है। बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है ताकि स्थिति बिगड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।

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