गुलामी के लिए भारत समेत 56 देशों से माफी पर विचार को तैयार ब्रिटेन, लेकिन मुआवजा देने से इनकार
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम गुलामी के इतिहास पर भारत समेत 56 कॉमनवेल्थ देशों के साथ संवाद और औपचारिक माफी पर विचार को तैयार हैं, लेकिन वित्तीय मुआवजे से इनकार किया है।;
कॉमनवेल्थ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक से पहले बर्नहम ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' में एक लेख लिखकर अपनी बात रखी। कॉमनवेल्थ में भारत समेत कुल 56 देश शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या उन देशों की है, जो कभी ब्रिटिश शासन के अधीन रहे थे।
बर्नहम बोले- गुलामी का दर्द आज भी महसूस किया जा सकता है
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने लेख में स्वीकार किया कि ट्रांस-अटलांटिक गुलामों का व्यापार मानवता के खिलाफ क्रूर अत्याचार था। इस दौरान लाखों लोगों को उनके परिवारों से अलग कर दिया गया, उन्हें संपत्ति की तरह बेचा गया और अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया।
बर्नहम ने कहा कि वह इस व्यापार के कारण लाखों लोगों को हुए दर्द और पीड़ा पर दुख और अफसोस व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने माना कि गुलामी का असर आज भी दुनिया में दिखाई देता है। उनका कहना है कि प्रभावित देशों के साथ एक व्यवस्थित संवाद शुरू किया जाएगा, जिसमें ब्रिटिश राज्य की ओर से औपचारिक माफी की मांग भी शामिल होगी।
मुआवजे की मांग को बताया गलत रास्ता
बर्नहम ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन वित्तीय मुआवजे को इस समस्या का उचित समाधान नहीं मानता। उनके मुताबिक, आज के ब्रिटिश नागरिकों को उन ऐतिहासिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिनमें उनकी व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी।
इसके बजाय ब्रिटेन गरीब कॉमनवेल्थ देशों का कर्ज चुकाने का बोझ कम करने की पहल करना चाहता है। इसके तहत कर्ज लौटाने के लिए अधिक समय और बेहतर ब्याज दरों की व्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम किया जाएगा। इस पहल में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन की भी भूमिका होगी।
किंग चार्ल्स ने भी गुलामी के इतिहास का किया जिक्र
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय इन दिनों कैरेबियाई देशों के दौरे पर हैं। उन्होंने बहामास में ब्रिटिश शासन के दौरान हुए अत्याचारों और गुलामी के इतिहास का जिक्र करते हुए पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी थी।
ब्रिटिश संसद ने 1833 में गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने वाला कानून पारित किया था। हालांकि, इसके बाद भी ब्रिटेन का औपनिवेशिक शासन और दूसरे देशों का शोषण जारी रहा।
जल्द भारत आ सकते हैं ब्रिटिश प्रधानमंत्री
इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के जल्द भारत दौरे पर आने की संभावना भी जताई गई है। भारत में ब्रिटेन के कार्यवाहक उच्चायुक्त बेन मेलर ने पीटीआई को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पदभार संभालने के बाद बातचीत में बर्नहम ने भारत आने की इच्छा जताई थी। मेलर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी के मद्देनजर यह यात्रा जल्द हो सकती है।