नई दिल्ली: रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में आयोजित इस रैली में 23 राजनीतिक दलों के नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला और तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता इस आयोजन में पहुंचे। विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा। आयोजकों ने रैली में करीब 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया है।
खरगे के आवास पर जुटे विपक्षी नेता
महारैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, केरल के मुख्यमंत्री, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका गांधी सहित कई वरिष्ठ नेता यहां पहुंचे। इसके बाद INDIA गठबंधन के सांसद और प्रमुख नेता मिंटो ब्रिज की ओर रवाना हुए। राहुल गांधी भी विपक्षी नेताओं के साथ खुली बस में सवार होकर रामलीला मैदान पहुंचे। इस दौरान अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं की मौजूदगी रही। रैली शाम पांच बजे तक आयोजित किए जाने का कार्यक्रम था।
राहुल गांधी का आरोप- बीजेपी ने बंद करवाईं दुकानें
रैली में शामिल होने जाते समय राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने रैली में आने वाले लोगों से अपील की थी कि वे स्थानीय दुकानों से खरीदारी करें, ताकि व्यापारियों को फायदा हो सके। लेकिन कनॉट प्लेस पहुंचने पर पता चला कि बीजेपी ने कथित तौर पर जबरदस्ती दुकानें बंद करवा दी हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी छोटे दुकानदारों का नुकसान कर रही है और देश यह सब देख रहा है। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर लोगों से रैली में शामिल होने के साथ स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की अपील की थी। उनका कहना था कि विरोध-प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे छोटे व्यापारियों को फायदा पहुंचना चाहिए।
रामगोपाल यादव बोले- बीजेपी की बातों पर कौन भरोसा करेगा?
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने रैली को अभूतपूर्व बताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा झूठ बोलती है और उसकी बातों पर कौन भरोसा कर सकता है। सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि जब जनता को अपने अधिकारों और संस्थाओं की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रह जाता, तो उसके पास सड़कों पर उतरकर आवाज उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जनता के अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़ा सवाल है। वहीं, सपा सांसद प्रिया सरोज ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आयोग की प्रक्रिया सही है तो उसे सामने आकर तथ्यों और सबूतों के आधार पर आरोपों का जवाब देना चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी से सवालों का समाधान नहीं होगा।
हुड्डा बोले- ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी के आह्वान पर लाखों लोग दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने इसे जनता की आवाज बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। हुड्डा ने राहुल गांधी के व्यापारियों से खरीदारी करने के आग्रह का समर्थन करते हुए कहा कि रैली से दुकानदारों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि लोगों की खरीदारी से उन्हें फायदा मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी जिम्मेदारी लेते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उनके बाद राज्य में मिली प्रशासनिक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया।
250 CCTV कैमरों से निगरानी
रामलीला मैदान में रैली को लेकर सुबह से ही समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। दिल्ली पुलिस के डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे से लोग कार्यक्रम स्थल पर आने लगे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने भीड़ प्रबंधन, प्रतिभागियों की आवाजाही और स्थानीय निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस के अनुसार, पूरे इलाके में 200 से 250 सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। आयोजकों ने भी अपना कंट्रोल रूम बनाया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और आयोजकों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। इसके अलावा मार्च के मार्ग और यातायात व्यवस्था को लेकर भी योजना तैयार की गई थी।
SIR और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर विपक्ष का जोर
इस महारैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है। विपक्षी दलों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जरूरत है। INDIA गठबंधन इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है। रैली के जरिए विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता का सवाल केवल किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसे लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा अभियान बताया है। अब इस शक्ति प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष के इस अभियान का आगामी चुनावी राजनीति और चुनाव आयोग के साथ उसके टकराव पर क्या असर पड़ता है।