नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। रविवार, 1 नवंबर से कई नए प्रतिबंध और दिशा-निर्देश लागू किए जा रहे हैं। इनके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देनी होगी। वहीं, अधिकृत पार्किंग स्थलों पर वाहनों को खड़ा करने का शुल्क दोगुना कर दिया गया है। निर्माण गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले बीएस-6 से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिलेगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए गए इन नियमों का दायरा दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के शहरों तक फैला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहन भी नए प्रतिबंधों के दायरे में आएंगे। हालांकि, दिल्ली नंबर की बीएस-6 से नीचे की गाड़ियां वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के साथ चल सकेंगी। प्रशासन का उद्देश्य सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या कम करना और यातायात से होने वाले उत्सर्जन पर अंकुश लगाना है।
पुराने वाहनों और बाहरी बसों पर सख्ती
नए नियमों के अनुसार, दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-6 से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहरी राज्यों की बीएस-6 से नीचे की डीजल बसों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। एनसीआर के चार प्रमुख शहरों से आने वाले लगभग दस लाख वाहन इस व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं। कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टरों और स्थानीय जुगाड़ वाहनों के परिचालन पर भी रोक रहेगी। दिल्ली से होकर गुजरने वाले ऐसे मालवाहक ट्रकों को, जिनका दिल्ली में कोई गंतव्य नहीं है, पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर भेजा जाएगा। किसी भी वाहन को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना छूट नहीं मिलेगी।
सीएनजी, इलेक्ट्रिक और आपातकालीन वाहनों को राहत
प्रतिबंधों के बीच कुछ श्रेणियों के वाहनों को छूट दी गई है। वैध पीयूसी वाले बीएस-6 पेट्रोल और डीजल वाहन दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे। सभी सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी राजधानी में चलने की अनुमति होगी। इसके अलावा एंबुलेंस, दमकल, पुलिस और सरकारी ड्यूटी में तैनात आपातकालीन वाहनों को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी। हालांकि, केवल व्यावसायिक श्रेणी का वाहन होने से उसे प्रतिबंध से राहत नहीं मिलेगी। यानी वाहन को छूट पाने के लिए निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा करना होगा।
निर्माण कार्यों पर रोक, कचरा जलाने पर भी प्रतिबंध
प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल धूल और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सख्ती की गई है। धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्य बंद रहेंगे। इनडोर निर्माण गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। इसके साथ ही खुले में कचरा, सूखी पत्तियां और प्लास्टिक जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे कचरा जलाने से बचें और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन करें। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
आधे कर्मचारी करेंगे घर से काम, पार्किंग शुल्क दोगुना
सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की गई है। इसका मकसद सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाले धुएं को कम करना है। निजी कार्यालयों को अलग-अलग शिफ्ट में काम कराने, कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे निजी वाहनों के इस्तेमाल में कमी आएगी।
सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव
प्रदूषण नियंत्रण और यातायात प्रबंधन के लिए सरकारी कार्यालयों की टाइमिंग भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे। वहीं, दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुलेंगे। निजी संस्थानों को भी कर्मचारियों की सुविधा के अनुसार अलग-अलग शिफ्ट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
क्या है बीएस-6 मानक?
भारत स्टेज-6 (बीएस-6) वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों को नियंत्रित करने वाला उत्सर्जन मानक है। इसे अप्रैल 2020 से देश में अनिवार्य किया गया था। इस तकनीक में इंजन और प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली के जरिए हानिकारक उत्सर्जन को कम किया जाता है। इससे पहले बीएस-4 और बीएस-3 मानक वाले वाहन अधिक प्रदूषण फैलाने वाले माने जाते हैं। प्रदूषण संबंधी शिकायत या आपात स्थिति में लोग पुलिस हेल्पलाइन 112 पर संपर्क कर सकते हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के लिए 011-25844444 और 1095 नंबर भी उपलब्ध हैं।