तरुण तेजपाल को बड़ा झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया

2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। अदालत ने 2021 में गोवा ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को पलट दिया। अब सजा पर फैसला होना बाकी है।;

Update: 2026-08-06 06:33 GMT
मुंबई। वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 2013 के चर्चित मामले में गोवा ट्रायल कोर्ट के 2021 के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों और पीड़िता के बयान का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया था। दोषसिद्धि के बाद अब सभी की नजर सजा के ऐलान पर टिकी है। मामले की सुनवाई के दौरान गोवा सरकार ने अदालत से तेजपाल को हिरासत में लेने की भी मांग की।

2021 का बरी करने वाला फैसला पलटा

गोवा की ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2021 में तरुण तेजपाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इस फैसले को गोवा सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया था।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और अब अपना निर्णय सुनाते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप है कि गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी महिला सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न किया था। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच हुई और तेजपाल के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया गया।

यह मामला लंबे समय तक देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामलों में शामिल रहा। ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि "ना का मतलब हमेशा ना होता है।" उन्होंने दलील दी कि निचली अदालत ने पीड़िता के व्यवहार को लेकर पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया और मामूली विरोधाभासों को अत्यधिक महत्व दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी यौन उत्पीड़न पीड़िता की प्रतिक्रिया का कोई एक तय मानक नहीं हो सकता। हर व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि, परिस्थितियां और मानसिक स्थिति अलग होती है। इसलिए शिकायतकर्ता के मूल आरोपों की निरंतरता पर ध्यान दिया जाना चाहिए था।

बचाव पक्ष ने क्या कहा?

तरुण तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि अभियोजन पक्ष ने माफी वाले ईमेल को गलत तरीके से अपराध स्वीकार करने के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता के ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश और अन्य दस्तावेज अभियोजन के आरोपों से मेल नहीं खाते।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित घटना का विवरण उपलब्ध तकनीकी और सीसीटीवी साक्ष्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाता।

फैसले पर क्या बोले तरुण तेजपाल?

अदालत के फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि वह स्वयं को पीड़ित मानते हैं। उन्होंने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि उनकी उम्र 62 वर्ष है और वह इस फैसले के खिलाफ आगे अपील करने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्य अदालत के रिकॉर्ड में मौजूद हैं।

इस मामले में दोषसिद्धि के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा पर सभी की नजर बनी हुई है।

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