ग्रीनलैंड पर ट्रंप की रणनीति को मिली नई दिशा, अमेरिका को सैन्य मौजूदगी की मंजूरी लेकिन संप्रभुता पर डेनमार्क की दो टूक

शुक्रवार देर रात घोषित समझौते के मुताबिक अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की अनुमति मिलेगी। साथ ही किसी अमेरिकी विरोधी देश या ताकत को वहां सैन्य अड्डा स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी।;

Update: 2026-09-20 10:25 GMT

कोपेनहेगेन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकियों के मद्देनजर महीनों तक चले भू-राजनीतिक तनाव के बाद डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच एक समझौता (डील) हुआ है। अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। हालांकि ट्रंप ने दावा किया है कि इस डील से वाशिंगटन को आर्कटिक द्वीप की सुरक्षा पर "स्थायी नियंत्रण" मिल गया है, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ कर दिया है कि वे अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे। अपनी धमकी से नाटो गठबंधन के भीतर हड़कंप मचाने वाले ट्रंप का ग्रीनलैंड को हथियाने का सपना पूरा नहीं हो पाया है। अलबत्ता, ग्रीनलैंड की सुरक्षा की रणनीतिक चौकीदारी अमेरिका को जरूर मिल गई है।

संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई आंच नहीं आएगी

डेनमार्क और स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते (डील) से ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई आंच नहीं आएगी। शुक्रवार देर रात घोषित इस समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी मजबूत सैन्य मौजूदगी दर्ज कराने की अनुमति होगी, जबकि किसी भी अमेरिकी विरोधी ताकत या देश को वहां अपने सैन्य अड्डे बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि इस डील के कई अहम ब्योरे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अगले सप्ताह इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे।

ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्‍यता

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने फेसबुक पर बयान जारी कर उम्मीद जताई कि यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करेगा और नाटो के भीतर साझा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बशर्ते डेनमार्क साम्राज्य की 'लक्ष्मण रेखाओं' (रेड लाइन) का पूरा सम्मान किया जाए। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने भी इस समझौते पर संतोष जताते हुए कहा कि यह डील ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार और साम्राज्य की संप्रभुता को मान्यता देती है।

ग्रीनलैंड की चौकीदारी अमेरिका को मिली

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर अपने चिरपरिचित अंदाज में दावा किया कि इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक हो, वह सब करने की पूर्ण शक्ति मिल गई है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने में असफल रहे हों, लेकिन रणनीतिक रूप से उन्हें वह चौकीदारी मिल गई है जिसकी वे लंबे समय से तलाश कर रहे थे। हालांकि, कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिक्केल वेडबी रासमुसेन ने चिंता जताई है कि क्या यह डेनमार्क के औपनिवेशिक रिश्ते को अमेरिका के साथ किसी नए रूप में बदलने की शुरुआत तो नहीं है।

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