फरक्का जल संधि पर बड़ा सवाल, 2026 में खत्म हो रहा भारत-बांग्लादेश समझौता; बिहार की मांग से बढ़ी हलचल

फरक्का जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। जानें भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते, बिहार की आपत्तियों और केंद्र सरकार के रुख की पूरी कहानी।;

Update: 2026-09-20 04:33 GMT
नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़ी फरक्का जल संधि अब अपने अहम मोड़ पर पहुंच गई है। 12 दिसंबर 1996 को दोनों देशों के बीच हुई यह संधि दिसंबर 2026 में 30 साल पूरे होने के साथ समाप्त होने वाली है। ऐसे में इसके नवीनीकरण या नई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि भारत और बांग्लादेश के बीच आगे किस तरह की व्यवस्था होगी।

क्या है फरक्का जल संधि?

फरक्का संधि को आधिकारिक तौर पर Ganges Water Sharing Treaty कहा जाता है। इसके तहत फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का भारत और बांग्लादेश के बीच बंटवारा किया जाता है। समझौते में मुख्य रूप से हर साल 1 जनवरी से 31 मई के बीच शुष्क मौसम में पानी के बंटवारे की व्यवस्था तय की गई है। यह समझौता 30 वर्षों के लिए हुआ था और अब इसकी अवधि पूरी होने वाली है।

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में हुआ था। इसका उद्देश्य गंगा के पानी को हुगली नदी की ओर मोड़कर कोलकाता बंदरगाह में गाद की समस्या को कम करना था। हालांकि, इसके जल प्रवाह और गाद प्रबंधन को लेकर बिहार तथा बांग्लादेश में अलग-अलग चिंताएं सामने आती रही हैं।

बिहार क्यों कर रहा संधि के नवीनीकरण का विरोध?

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का तर्क है कि फरक्का बैराज और उससे जुड़ी गाद की समस्या का असर राज्य में बाढ़ और गर्मियों में पानी की उपलब्धता पर पड़ता है। जेडीयू नेता और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने केंद्र से आग्रह किया है कि किसी भी नई व्यवस्था में बिहार की मौजूदा और भविष्य की जल जरूरतों को शामिल किया जाए।

बिहार सरकार का कहना है कि गंगा में गाद जमा होने से नदी की जलधारण क्षमता प्रभावित होती है और मानसून के दौरान बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, बिहार की बाढ़ के पीछे केवल फरक्का को जिम्मेदार ठहराना एक जटिल विषय है, क्योंकि नदी प्रवाह, स्थानीय बारिश, सहायक नदियों और अन्य भौगोलिक परिस्थितियां भी भूमिका निभाती हैं।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संजय झा को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार बिहार की चिंताओं से अवगत है। उनके मुताबिक जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा हुई है और बिहार की पेयजल तथा औद्योगिक जल जरूरतों को भी इन विचार-विमर्श में शामिल किया गया। सरकार ने कहा है कि इन पहलुओं को ध्यान में रखकर उचित फैसला लिया जाएगा।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर

फरक्का समझौता सिर्फ बिहार या पश्चिम बंगाल से जुड़ा मुद्दा नहीं है। यह भारत-बांग्लादेश के बीच सीमा-पार नदी जल प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए आगे की व्यवस्था तय करते समय भारत को घरेलू राज्यों की जल जरूरतों के साथ बांग्लादेश के साथ जल साझेदारी से जुड़े दायित्वों और क्षेत्रीय सहयोग को भी ध्यान में रखना होगा।

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