Delhi: SIR में मतदाता विवरण की विसंगतियों पर नोटिस, रेखा गुप्ता, केजरीवाल के परिवार और कपिल सिब्‍बल के नाम भी शामिल

पूर्व मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, उनके बेटे और माता पिता की प्रविष्टि में भी विसंगति मिली है। केजरीवाल व उनके स्वजन नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।;

Update: 2026-09-20 10:13 GMT

नई दिल्लीः दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान मतदाता सूची में विवरण से जुड़ी विसंगतियों की जांच की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ऐसे नोटिस का उद्देश्य किसी मतदाता का नाम सीधे सूची से हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड में सामने आई विसंगति का सत्यापन करना है। अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं।

रेखा गुप्ता के रिकॉर्ड का सत्यापन, नाम सूची में बरकरार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की मतदाता हैं। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान उनके मतदाता रिकॉर्ड को जनगणना प्रपत्र में उपलब्ध विवरण के आधार पर तार्किक विसंगतियों वाली प्रविष्टियों की सूची में रखा गया था। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें नोटिस जारी किया गया। नोटिस मिलने के बाद मुख्यमंत्री की ओर से आवश्यक दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराए गए। इसके बाद नामित बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया। अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद रेखा गुप्ता की प्रविष्टि को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मान्य कर दिया गया है। अंतिम सूची का आधिकारिक प्रकाशन 4 नवंबर को प्रस्तावित है।

केजरीवाल परिवार के पांच सदस्यों को नोटिस

पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के परिवार के सदस्यों के नाम भी इस प्रक्रिया में सामने आए हैं। केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, उनके बेटे और माता-पिता नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। दिल्ली निर्वाचन अधिकारी से संबंधित दस्तावेजों के अनुसार, नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के पार्ट-51, केजी मार्ग में 110 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें अरविंद केजरीवाल के परिवार के पांच सदस्यों के नाम भी शामिल हैं। आम आदमी पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सवाल उठाया कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश क्यों की जा रही है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि नोटिस जारी करना सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग का कहना- नोटिस के बाद होता है भौतिक सत्यापन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, SIR के दौरान किसी मतदाता की प्रविष्टि में विसंगति मिलने पर संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है। इसके बाद BLO मतदाता के पते पर जाकर उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों का सत्यापन करता है। इस प्रक्रिया में मतदाता को अपनी प्रविष्टि से जुड़े तथ्य और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में भी अधिकारियों के अनुसार यही प्रक्रिया अपनाई गई और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी प्रविष्टि को मान्य कर दिया गया।

कपिल सिब्बल और भाजपा नेताओं को भी नोटिस

यह मामला केवल राजनीतिक दलों के नेताओं तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के अलावा भाजपा नेता सुधांशु मित्तल, दिल्ली प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, उनकी पत्नी और भाई समेत कई अन्य मतदाताओं को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं। सिब्बल ने अपने मामले को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके पुराने मतदाता रिकॉर्ड का मिलान हो चुका है, BLO उनके दस्तावेज और फॉर्म पर हस्ताक्षर कर चुका है और उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में भी मौजूद है। इसके बावजूद उन्हें ‘Unmapped with Last SIR’ श्रेणी में नोटिस मिलने की जानकारी दी गई।

सिब्बल ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

सिब्बल के मुताबिक, उन्हें नोटिस की जानकारी सीधे चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि फोन के जरिए मिली। उन्होंने दावा किया कि उनके पास नोटिस की भौतिक प्रति भी नहीं पहुंची। वेबसाइट पर जानकारी देखने के बाद उन्होंने अपने कार्यालय के जरिए इसकी पुष्टि कराने की कोशिश की। प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस मामले को लेकर अदालत का रुख करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे। सिब्बल ने कहा कि वह अपने मताधिकार से जुड़े मामले में अदालत में आवेदक बनकर जाने के बजाय इस पूरी प्रक्रिया के आंकड़े जुटाकर सार्वजनिक करना चाहते हैं।

2029 के चुनाव से जोड़कर भी उठाया सवाल

सिब्बल ने कहा कि वह आगे इस प्रक्रिया से जुड़े और आंकड़े सामने लाएंगे। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में सामने आ रही कथित अनियमितताओं को देश के सामने रखने की जरूरत है। उन्होंने इस कवायद को 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर सवाल उठाया। दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक SIR में विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस देना सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के बाद लिया जाता है। इसलिए नोटिस मिलने और मतदाता सूची से नाम हटने को एक ही प्रक्रिया मानना उचित नहीं होगा। दिल्ली में SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्यापन के बाद कितनी प्रविष्टियों में सुधार किया जाता है और अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल रहते हैं।

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