Bihar Politics : अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार: जदयू में बढ़ी खींचतान, पटना स्नातक सीट पर सियासी मुकाबला दिलचस्प

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने मोकामा से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में अनंत सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की।;

Update: 2026-09-20 07:46 GMT

पटना : Anant Singh vs Neeraj Kumar: बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर मोकामा विधायक अनंत सिंह और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के बीच पुरानी अदावत एक बार फिर सामने आ गई है। इस बार विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर है। अनंत सिंह ने नीरज कुमार की चुनावी जमानत जब्त कराने का ऐलान किया है, जबकि नीरज ने भी उन्हें खुली चुनौती देते हुए कहा है कि पहले उन्हें हिंदी में ‘जमानत’ लिखना सीखना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच चल रही इस जुबानी जंग ने जदयू नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

2015 से चली आ रही है दोनों नेताओं की खींचतान

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नई नहीं है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने मोकामा से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में अनंत सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही। वर्ष 2020 में अनंत सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर मोकामा विधानसभा चुनाव जीता। हालांकि, वर्ष 2022 में एक मामले में सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी ने राजद उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की। वर्ष 2025 में मामले में बरी होने के बाद अनंत सिंह फिर जदयू में लौटे और मोकामा से विधायक बने।

वोट नहीं मांगने को लेकर नाराज हैं अनंत सिंह

नीरज कुमार के खिलाफ अनंत सिंह की मौजूदा नाराजगी का एक कारण 2025 का विधानसभा चुनाव बताया जा रहा है। अनंत सिंह का आरोप है कि नीरज कुमार ने उनके लिए चुनाव प्रचार नहीं किया और उनके पक्ष में वोट नहीं मांगा। अनंत सिंह का दावा है कि नीरज ने उनके विरोध में काम किया था। इसी नाराजगी के बाद उन्होंने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में नीरज कुमार की जमानत जब्त कराने की घोषणा कर दी। नीरज कुमार इस सीट से लगातार चौथी बार जीत हासिल करने के लिए चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। चुनाव अक्टूबर में प्रस्तावित है।

‘दलगत चुनाव नहीं’ वाले तर्क पर भी विवाद

अनंत सिंह का कहना है कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव विधानसभा चुनाव की तरह दलगत आधार पर नहीं होता। उनका तर्क है कि यदि वह किसी निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करते हैं तो इसे जदयू का विरोध नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक, स्नातक और स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव के दौरान मतपत्र पर राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न नहीं होते। इसके बावजूद राजनीतिक दल अपने अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा करते हैं और निर्वाचित होने के बाद संबंधित सदस्य उसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में अनंत सिंह का किसी निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में खड़ा होना जदयू के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ललन सिंह के हस्तक्षेप का इंतजार

जदयू के भीतर इस विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। पार्टी नेतृत्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहा है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि उनके हस्तक्षेप से अनंत सिंह के रुख में बदलाव आ सकता है। वहीं, विवाद सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने जदयू की ओर से सक्रियता बढ़ाई है। उन्होंने नालंदा जिले के पार्टी के इकलौते सांसद के साथ विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक की। पार्टी स्तर पर इस सक्रियता को नीरज कुमार के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नालंदा और नवादा जिले के स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। वर्तमान में इस निर्वाचन क्षेत्र में 85 हजार से अधिक मतदाता बताए जा रहे हैं। ऐसे में अनंत सिंह का रुख चुनाव के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अगर अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में मजबूती से खड़े रहते हैं तो मुकाबला जदयू और निर्दलीय खेमे के बीच सीधा संघर्ष बन सकता है। वहीं राजद ने इस सीट से दिलीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में चुनावी मैदान में जदयू, निर्दलीय और राजद के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी नेतृत्व अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच जारी टकराव को किस तरह संभालता है। यदि विवाद चुनाव तक बना रहता है तो पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सिर्फ एक विधान परिषद सीट का मुकाबला नहीं रहकर जदयू के भीतर दो प्रभावशाली नेताओं की राजनीतिक खींचतान के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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