सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गईं सभी एफआईआर को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दिल्ली समेत 5 राज्यों में छात्रों की एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। 2,873 लोगों पर अलग से कार्रवाई की अनुमति दी गई।;

Update: 2026-09-01 10:35 GMT

नई दिल्ली। नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली समेत पांच राज्यों में दर्ज प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह राहत दी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी संगठन सीजेपी ने भी 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। संगठन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार के भरोसे और अदालत के आदेश को देखते हुए मार्च स्थगित किया जा रहा है।

दिल्ली समेत इन 5 राज्यों में एफआईआऱ होंगी रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के अलावा असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में NEET प्रदर्शन से जुड़ी FIR खत्म करने का निर्देश दिया है। ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित बताए गए हैं।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। दिल्ली पुलिस और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से भी अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को समाप्त करने की मांग की गई थी।

जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के दौरान दिए गए भरोसे पर कायम है। उन्होंने बताया कि नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।

केंद्र ने मुआवजे की प्रक्रिया तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों और अन्य पक्षों के साथ बातचीत कर व्यवस्था तय की जाएगी।

2,873 लोगों पर कार्रवाई की अनुमति क्यों?

हालांकि प्रदर्शन से जुड़ी FIR में छात्रों को राहत मिली है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है, जिनके बारे में आपराधिक इतिहास होने की जानकारी दी गई है।

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है। सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने इन लोगों की सूची मांगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन व्यक्तियों के खिलाफ उनके कथित आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बातचीत से निकलेगा समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से आपसी विश्वास के साथ बातचीत जारी रखने की अपील की। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष खुले दिमाग से बातचीत करें तो मुश्किल मुद्दों का समाधान भी निकाला जा सकता है।

तुषार मेहता ने भी कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। कोर्ट के आदेश के बाद सीजेपी ने 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया।

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