राम मंदिर ट्रस्ट में आज होंगे बड़े फैसले, नए ट्रस्टी और महासचिव पर नजर; सीईओ चयन पर अभी बना सस्पेंस
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज होगी। नए ट्रस्टियों, स्थायी महासचिव और राम मंदिर प्रबंधन को लेकर बड़े फैसले संभव हैं, जबकि CEO चयन पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।;
हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। वहीं अयोध्या राज परिवार से जुड़े एक सदस्य के निधन के कारण पहले से ही एक पद रिक्त था। ऐसे में ट्रस्ट के तीन पदों पर नियुक्ति को लेकर पिछले कई दिनों से मंथन चल रहा था, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
दो संतों के नाम सबसे आगे
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में नियमित ट्रस्टी के रूप में अयोध्या से जुड़े संतों को प्राथमिकता दिए जाने पर सहमति बनती दिखाई दे रही है। इस क्रम में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण और स्वामी राजकुमार दास के नाम सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
स्वामी राजकुमार दास लंबे समय से गुरुकुल शिक्षा और भारतीय शिक्षण मंडल से जुड़े रहे हैं तथा संत समाज में उनकी व्यापक स्वीकार्यता है। वहीं आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण अपने विद्वतापूर्ण व्याख्यानों और हिंदी, संस्कृत, उर्दू तथा अंग्रेजी भाषाओं पर मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। दोनों ही संत वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े माने जाते हैं।
इन संतों को मिल सकती है विशेष जिम्मेदारी
बैठक में कुछ वरिष्ठ संतों को आमंत्रित सदस्य बनाए जाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। इनमें मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास, रंगमहल के महंत रामशरण दास, रामकथा कुंज के महंत डॉ. रामानंद दास और जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर के नाम प्रमुख हैं। ये सभी राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
विहिप की ओर से भी कई नाम चर्चा में
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की दिल्ली में हुई हालिया बैठक में भी ट्रस्ट के रिक्त पदों को लेकर कई नामों पर विचार किया गया। सूत्रों के मुताबिक विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल बांगड़ा का नाम ट्रस्टी के साथ-साथ महासचिव पद के लिए भी चर्चा में है। इसके अलावा बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दानोदिया और विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुम चंद्र सांवला के नाम भी सामने आए हैं।
उधर निर्मोही अखाड़ा की ओर से अयोध्या राजपरिवार के सदस्य, साहित्यकार और संस्कृति विशेषज्ञ यतीन्द्र मिश्र का नाम भी प्रस्तावित किए जाने की चर्चा है। उनका नाम मंदिर के सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास से जुड़े कार्यों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
महासचिव पद पर बना संशय
चंपत राय के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उन्हें स्थायी महासचिव बनाए जाने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पिछले दो सप्ताह के दौरान कृष्ण मोहन ने मुख्य रूप से वित्तीय और लेखा-जोखा संबंधी कार्यों पर ध्यान दिया, जबकि मंदिर के दैनिक संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था अन्य पदाधिकारियों के माध्यम से संचालित होती रही।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान कई प्रशासनिक फाइलें लंबित रहीं, क्योंकि कुछ मामलों में स्थायी महासचिव के हस्ताक्षर आवश्यक थे। यही कारण रहा कि कुछ कर्मचारियों के वेतन जारी होने में भी देरी की चर्चा सामने आई। माना जा रहा है कि बुधवार की बैठक में इस पद पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
CEO की नियुक्ति पर फैसला अभी बाकी
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाने के उद्देश्य से पहली बार मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया था। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी।
हालांकि CEO पद के लिए अपेक्षा से अधिक आवेदन प्राप्त होने के कारण सभी उम्मीदवारों की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में संभावना है कि बुधवार की बैठक में CEO के चयन पर चर्चा टाल दी जाए और स्क्रीनिंग पूरी होने के बाद अंतिम नाम ट्रस्ट के सामने रखे जाएं।
प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने पर रहेगा फोकस
ट्रस्ट की इस बैठक को केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मंदिर की सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट मंदिर प्रशासन में व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।