हरीश रावत का बड़ा एलान: पूर्व CM का कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा, इस एक्शन के बाद बड़ा फैसला

हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कदम या भूमिका की वजह से कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में कमजोर पड़े। रावत ने कहा कि पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।;

Update: 2026-09-12 05:44 GMT

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शनिवार को कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति में अपने कार्यकारी सदस्य के पद और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) में स्थायी आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी छोड़ने का ऐलान किया। रावत का यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद आया है। ईडी की यह कार्रवाई 2016 की उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धन शोधन जांच का हिस्सा बताई जा रही है।

बोले- मेरी वजह से पार्टी का संघर्ष कमजोर न हो

हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कदम या भूमिका की वजह से कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में कमजोर पड़े। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को महत्वपूर्ण बताते हुए रावत ने कहा कि पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया और कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। रावत के मुताबिक, ऐसे समय में उनका पहला उद्देश्य यही है कि उनकी वजह से पार्टी के अभियान पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

चंदन सिंह जीना पर ED कार्रवाई के बाद उठे सवाल

ईडी ने रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबर सामने आई। ईडी की जांच कथित तौर पर 2016 की UKSSSC भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। रावत ने यह स्वीकार किया कि चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने सरकार तथा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सहयोगी के खिलाफ किसी गलत काम के आरोप से इनकार किया। उन्होंने जीना को मेहनती और सरल स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए कहा कि यदि ग्राम सेवक भर्ती की ओएमआर शीट में वास्तव में छेड़छाड़ हुई है तो यह गंभीर और शर्मनाक बात होगी, लेकिन उन्हें फिलहाल इस आरोप पर विश्वास नहीं है।

सरकारी पद पर नहीं, संगठन में निभा रहे थे जिम्मेदारी

रावत ने स्पष्ट किया कि वह वर्तमान में कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफे का सवाल नहीं है। वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य थे। उन्होंने इन्हीं दोनों संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का फैसला किया है। रावत ने कहा कि उनका यह कदम पार्टी के प्रति जिम्मेदारी की भावना से जुड़ा है। वह नहीं चाहते कि उनके नाम या किसी विवाद के कारण कांग्रेस का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान प्रभावित हो।

BJP पर भी साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए राजनीतिक कहानी तैयार करने की कोशिश की जा रही है। रावत ने तंज कसते हुए कहा कि जब सीबीआई या अन्य एजेंसियां किसी के दरवाजे तक पहुंचती हैं, तो चुनाव का माहौल बन जाता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर केंद्र सरकार या जांच एजेंसी की ओर से कोई अलग प्रतिक्रिया यहां उपलब्ध नहीं है। ईडी की जांच में सामने आने वाले तथ्यों और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

UKSSSC नियुक्ति का किया बचाव

रावत ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति व्यक्ति के सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए की गई थी। उनका कहना था कि समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी नियुक्ति के पीछे एक कारण थी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) से भी इस संबंध में सलाह ली गई थी। रावत ने कहा कि खंडूरी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते थे।

भर्ती प्रक्रिया पर बोले- गलती हुई तो माफी मांगूंगा

UKSSSC की भूमिका पर रावत ने कहा कि आयोग की स्थापना राज्य के युवाओं के भविष्य और उन्हें समय पर रोजगार के अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए अलग-अलग भर्ती बोर्ड गठित किए गए थे, जिनमें चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बोर्ड भी शामिल थे। रावत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती हुई। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई गलती साबित होती है तो वह उत्तराखंड की जनता से माफी मांगने के लिए तैयार हैं। रावत ने अंत में कहा कि भर्ती परीक्षाओं या नियुक्तियों में किसी भी तरह की अनियमितता केवल एक परीक्षा या नौकरी तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

Tags:    

Similar News