'ब्रिक्स से भारत को क्या मिलेगा' चिदंबरम के इस सवाल का थरूर ने गिनाए भारत के फायदे

थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पी. चिदंबरम ने BRICS को लेकर सवाल उठाए थे। पूर्व वित्त मंत्री ने हाल के BRICS सम्मेलनों से मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल करते हुए कहा था कि उन्हें पिछले दो-तीन सम्मेलनों से भारत के लिए कोई स्पष्ट फायदा नजर नहीं आया।;

Update: 2026-09-12 04:43 GMT

नई दिल्ली: भारत में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने जहां हाल के BRICS सम्मेलनों से भारत को होने वाले लाभ पर सवाल उठाए, वहीं कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने सम्मेलन की मेजबानी को देश के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर बताया है। थरूर ने कहा कि BRICS की अध्यक्षता और सम्मेलन की मेजबानी भारत को वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताएं रखने के साथ-साथ कई देशों के नेताओं से सीधे संवाद का मौका देती है।

थरूर बोले- भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि

शशि थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया। उनके मुताबिक, सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के भी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में भारत को एक ही मंच पर कई शीर्ष विदेशी नेताओं के साथ बातचीत का अवसर मिल रहा है। थरूर ने कहा कि BRICS के अध्यक्ष के रूप में भारत की जिम्मेदारी केवल सम्मेलन आयोजित करने तक सीमित नहीं है। उसे ग्लोबल साउथ की चिंताओं को मजबूती से सामने रखना होगा और साथ ही अपने प्रत्यक्ष राष्ट्रीय हितों को भी ध्यान में रखना होगा।

मोदी की कई नेताओं से हो सकती है द्विपक्षीय बातचीत

कांग्रेस सांसद ने BRICS के दौरान होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठकों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में शामिल होने वाले विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ मुलाकात कर सकते हैं। थरूर के अनुसार, इन बैठकों के जरिए भारत को अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों तथा राष्ट्रीय हितों पर सीधे चर्चा करने का अवसर मिलेगा। उनका मानना है कि किसी बहुपक्षीय सम्मेलन का महत्व केवल उसके औपचारिक एजेंडे से नहीं, बल्कि उसके इतर होने वाली द्विपक्षीय बातचीत से भी तय होता है।

‘BRICS को पश्चिम विरोधी मंच बनाना भारत के हित में नहीं’

थरूर ने BRICS के भीतर मौजूद एक महत्वपूर्ण मतभेद की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि समूह के कुछ सदस्य देशों को BRICS को पश्चिम विरोधी मंच के रूप में देखने में सहजता हो सकती है, लेकिन भारत के लिए ऐसा रुख अपनाना राष्ट्रीय हित में नहीं होगा। उनके मुताबिक भारत को अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति बनाए रखते हुए विभिन्न शक्ति समूहों के साथ संबंधों को संतुलित करना चाहिए। BRICS में सक्रिय भूमिका निभाने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि भारत किसी एक धड़े के साथ खड़ा दिखाई दे।

आयोजन क्षमता भी भारत की ताकत

थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत की बढ़ती कूटनीतिक आयोजन क्षमता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करना अपने आप में महत्वपूर्ण है और इससे वैश्विक मंच पर भारत की क्षमता का प्रदर्शन होता है। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजनों के जरिए भारत को केवल नीतिगत मुद्दों पर अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता, बल्कि वह यह भी दिखाता है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी और उनके प्रबंधन में उसकी क्षमता कितनी मजबूत है।

चिदंबरम ने एक दिन पहले उठाया था सवाल

थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पी. चिदंबरम ने BRICS को लेकर सवाल उठाए थे। पूर्व वित्त मंत्री ने हाल के BRICS सम्मेलनों से मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल करते हुए कहा था कि उन्हें पिछले दो-तीन सम्मेलनों से भारत के लिए कोई स्पष्ट फायदा नजर नहीं आया। चिदंबरम ने यह भी सवाल किया था कि भारत BRICS के साथ-साथ SCO, G20 और QUAD जैसे अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन इन मंचों से देश को वास्तविक रूप से क्या लाभ मिल रहा है।

BJP ने चिदंबरम पर साधा था निशाना

चिदंबरम के बयान पर बीजेपी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने उन पर तंज कसते हुए कहा था कि भारत की बढ़ती ताकत से ‘नाराज फूफा’ फिर नाराज हो गए हैं। इस तरह BRICS सम्मेलन अब केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर घरेलू राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ चिदंबरम सम्मेलन से मिलने वाले ठोस परिणामों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं थरूर इसे भारत की कूटनीतिक पहुंच और राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। आने वाले दिनों में सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों और प्रमुख मुद्दों पर हुई बातचीत से यह आकलन करने का आधार मिलेगा कि भारत ने इस मंच का कितना प्रभावी इस्तेमाल किया।

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