7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर; गलवान के बाद रिश्तों की नई परीक्षा

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 के गोवा BRICS शिखर सम्मेलन में एक साथ मौजूद थे।;

Update: 2026-09-12 07:11 GMT

नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल के अंतराल के बाद शनिवार को भारत पहुंचे। नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जिनपिंग दोपहर करीब 12 बजे पालम एयरपोर्ट पहुंचे, जहां केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद यह शी जिनपिंग का पहला भारत दौरा है। ऐसे में उनकी यात्रा को भारत-चीन संबंधों में संभावित बदलाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। जिनपिंग के भारत पहुंचने के बाद सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक पर है। BRICS सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं के बीच शनिवार शाम बातचीत होने की उम्मीद है। सीमा विवाद और लंबे समय से जारी रणनीतिक मतभेदों के बीच होने वाली यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों की आगे की दिशा के संकेत दे सकती है।

चीन ने दिए रिश्ते सुधारने के संकेत

शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से कुछ घंटे पहले चीन के राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दोनों देशों के संबंधों को लेकर बीजिंग का रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि चीन और भारत के बीच राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था की जा रही है। चीनी राजदूत ने कहा कि कज़ान और तियानजिन में दोनों नेताओं की पिछली मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा साल होगा, जब वे एक-दूसरे से मिलेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि चीन भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने की दिशा में भी काम करना चाहता है।

‘मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाना जरूरी’

जू फीहोंग के मुताबिक, चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के तहत द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने संचार बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और मतभेदों का उचित समाधान तलाशने की बात कही। चीनी पक्ष की ओर से आया यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब गलवान के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। हालांकि सीमा पर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के जरिए कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दे अभी भी लंबित हैं।



 


गलवान के बाद पहली बार भारत आए जिनपिंग

शी जिनपिंग इससे पहले अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। तब उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ दूसरा अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन किया था। इसके कुछ महीनों बाद पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव बढ़ा और जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई। इस घटना में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी। चीन ने भी अपने सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि की थी, हालांकि उसने भारत से कम संख्या बताई। गलवान के बाद दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और कारोबारी संबंधों पर असर पड़ा। भारत ने चीनी निवेश और कई मोबाइल ऐप्स पर सख्त कदम उठाए, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे।

मोदी-शी वार्ता में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की बैठक में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में से एक रहने की संभावना है। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता का असर दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर पड़ता है। दूसरी ओर, चीन का कहना है कि सीमा विवाद को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास से अलग रखा जाना चाहिए। भारत की चिंताओं में चीनी नागरिकों और कारोबारियों से जुड़े वीजा प्रतिबंधों के साथ-साथ कुछ प्रमुख तकनीकों और उपकरणों के निर्यात से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी कायम हैं।

अरुणाचल से ब्रह्मपुत्र परियोजना तक कई चुनौतियां

शी जिनपिंग का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र के पास तकसिंग में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इस तरह की घटनाओं और उनके विवरण को लेकर आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण होगी। ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना भी भारत के लिए चिंता का विषय है। नई दिल्ली ने नदी के पानी और परियोजना से जुड़े आंकड़ों को लेकर अधिक पारदर्शिता तथा सूचना साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

एक दशक बाद साथ दिखेंगे मोदी-शी-पुतिन

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 के गोवा BRICS शिखर सम्मेलन में एक साथ मौजूद थे। ऐसे में इस बार की तस्वीर को भी वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोदी की कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम है। शनिवार को हैदराबाद हाउस में सुबह 10 बजे इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, 10:30 बजे मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, 11 बजे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद और 11:30 बजे वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद शाम 6 से 7 बजे के बीच भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति के साथ यह बातचीत केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि गलवान के बाद भारत-चीन संबंधों की दिशा को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव मानी जा रही है।

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