UCC पर ओवैसी का हमला, बोले- गैर हिंदुओं पर थोपा जा रहा हिंदू कानून; NDA दलों से विरोध की अपील

ओवैसी ने कहा कि ऐसा केवल 18 करोड़ मुसलमानों को टारगेट करने के लिए किया जा रहा है, ताकि अल्पसंख्यकों की धार्मिक पहचान को खत्म कर दिया जाए, ताकि समानता और धार्मिक स्वतंत्रता की संविधानिक गारंटी केवल नाममात्र की रह जाए।;

Update: 2026-09-16 09:01 GMT

भोपाल: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में बहस तेज होती दिखाई दे रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल में UCC को लेकर केंद्र और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता के नाम पर गैर हिंदू समुदायों पर हिंदू कानून लागू करने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समानता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया। ओवैसी ने एआईएमआईएम कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान UCC को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, संबंधित प्रावधानों की तुलना हिंदू उत्तराधिकार, हिंदू विवाह और हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण से जुड़े कानूनों से की जानी चाहिए।

ओवैसी का दावा- UCC में पुराने कानूनों की झलक

ओवैसी ने दावा किया कि अलग-अलग कानूनों के प्रावधानों को देखने पर उन्हें कई समानताएं दिखाई देती हैं और अंतर मुख्य रूप से धाराओं में है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों की व्यक्तिगत कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए UCC के प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए। AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि UCC का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे अल्पसंख्यकों की धार्मिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

आदिवासियों को छूट का सवाल भी उठाया

भोपाल में देर रात आयोजित जनसभा में ओवैसी ने UCC से आदिवासी समुदायों को अलग रखने के प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कुछ समुदायों को उनके पारंपरिक कानूनों के आधार पर UCC से बाहर रखा जा सकता है, तो मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानून को लेकर अलग व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानून और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए UCC के विरोध में एकजुट रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी मस्जिदों से जुड़े धार्मिक-सामाजिक जीवन को सक्रिय बनाए रखने की बात कही।

भाजपा और आरएसएस पर भी साधा निशाना

जनसभा में ओवैसी ने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मुसलमानों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका समुदाय दबाव में आने वाला नहीं है। ओवैसी ने अपने भाषण में सोवियत संघ के कम्युनिस्ट शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध और मदरसों को बंद किए जाने के बावजूद लोगों ने अपनी धार्मिक पहचान को बनाए रखा। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस भी मुस्लिम समुदाय की धार्मिक पहचान को खत्म नहीं कर पाएंगे।

NDA के सहयोगी दलों से भी विरोध की अपील

पत्रकारों से बातचीत में ओवैसी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों को भी UCC के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), एचडी कुमारस्वामी, चिराग पासवान और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि यदि इन दलों के भाजपा से अब भी कुछ वैचारिक मतभेद हैं तो उन्हें UCC का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ये दल पूरी तरह भाजपा की विचारधारा के साथ खड़े हो चुके हैं, तो स्थिति अलग है। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।

UCC को लेकर आगे भी जारी रहेगी राजनीतिक बहस

ओवैसी के बयानों से साफ है कि AIMIM UCC के मुद्दे को धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत कानून और अल्पसंख्यक अधिकारों के नजरिए से देख रही है। वहीं, UCC के समर्थक इसे नागरिक कानूनों में समानता से जोड़ते हैं। ऐसे में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद आगे भी चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

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