पश्चिम बंगाल में एनआईए के लिए दो नई विशेष अदालतें गठित, यूएपीए मामलों की सुनवाई होगी तेज

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में एनआईए की जांच वाले यूएपीए मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए कोलकाता में दो नई विशेष एनआईए अदालतों का गठन किया है। जानिए किन जिलों को मिलेगा इसका दायरा।;

Update: 2026-08-03 10:53 GMT

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से दो नई विशेष अदालतों के गठन को मंजूरी दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अधिसूचना जारी कर कोलकाता स्थित सिटी सेशंस कोर्ट भवन में स्पेशल NIA (एक्सक्लूसिव) कोर्ट नंबर-1 और स्पेशल एनआईए (एक्सक्लूसिव) कोर्ट नंबर-2 को अधिसूचित किया है। इन अदालतों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) सहित एनआईए द्वारा जांच किए गए अनुसूचित अपराधों की विशेष रूप से सुनवाई होगी।

18 जिलों के मामलों की होगी सुनवाई

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इन दोनों विशेष अदालतों का अधिकार क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 18 जिलों तक विस्तारित होगा। इनमें उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान, पूर्व बर्धमान, बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और कोलकाता शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने यह निर्णय राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 की धारा 11 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया है। इस संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और पश्चिम बंगाल सरकार से भी परामर्श किया गया।

उत्तर बंगाल की अदालतों का भी बदला अधिकार क्षेत्र

नई व्यवस्था लागू होने के बाद उत्तर बंगाल में पहले से नामित एनआईए अदालतों के अधिकार क्षेत्र में भी बदलाव किया गया है। सिलिगुड़ी स्थित अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत अब केवल दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, कालिम्पोंग और अलीपुरद्वार जिलों से जुड़े NIA मामलों की सुनवाई करेगी।

गृह मंत्रालय का कहना है कि इस पुनर्गठन से मामलों का बेहतर प्रबंधन होगा और लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी।

क्यों जरूरी हैं विशेष एनआईए अदालतें?

विशेष एनआईए अदालतों का गठन आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। इन अदालतों में गवाहों की सुरक्षा, संवेदनशील मामलों की प्रभावी सुनवाई और जटिल जांच से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा प्राथमिकता पर किया जाता है।

विशेष अदालतों का उद्देश्य सामान्य अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करना और आतंकवाद से जुड़े मामलों में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना भी है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिए थे निर्देश

दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए और यूएपीए से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए राज्यों में विशेष अदालतों की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बाद मार्च 2026 में शीर्ष अदालत ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह जानकारी मांगी थी कि ऐसे मामलों की समयबद्ध सुनवाई के लिए उन्हें कितनी विशेष अदालतों की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यूएपीए मामलों की सुनवाई यथासंभव प्रतिदिन होनी चाहिए और सभी परिस्थितियों में एक वर्ष के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

नई विशेष अदालतों के गठन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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