इजरायल-लेबनान युद्धविराम पर सहमत, हिज्बुल्ला के सामने रखीं दो बड़ी शर्तें; पश्चिम एशिया में शांति की नई उम्मीद
अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान युद्धविराम लागू करने पर सहमत हुए हैं। समझौते के तहत हिज्बुल्ला को गोलीबारी बंद करनी होगी और दक्षिणी लेबनान से अपने लड़ाकों को हटाना होगा। इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।;
वाशिंगटन। अमेरिका की मध्यस्थता से हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान युद्धविराम लागू करने पर सहमत हो गए हैं। लंबे समय से जारी सीमा तनाव और लगातार हो रहे हमलों के बीच यह समझौता पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इस सहमति के साथ दो प्रमुख शर्तें भी जुड़ी हैं, जिनका केंद्र हिज्बुल्ला संगठन है।
संयुक्त बयान के अनुसार युद्धविराम को प्रभावी बनाने के लिए हिज्बुल्ला को पूरी तरह से गोलीबारी बंद करनी होगी और दक्षिणी लेबनान से अपने सभी लड़ाकों को हटाना होगा। इजरायल का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और उसकी सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब हिज्बुल्ला की सैन्य गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगे।
नौ घंटे चली गहन वार्ता
अमेरिकी विदेश विभाग में हुई उच्चस्तरीय बातचीत करीब नौ घंटे तक चली। इससे पहले भी दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच प्रारंभिक स्तर पर कई दौर की चर्चा हुई थी। वार्ता का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में सहमति बनाना था।
समझौते के तहत दोनों देशों ने जून के तीसरे सप्ताह में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर की वार्ताओं को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ और संवाद सहयोगी की भूमिका निभाता रहेगा।
सीमा क्षेत्र में बनाए जाएंगे विशेष सुरक्षा जोन
सीमा क्षेत्र में स्थिरता कायम करने के लिए दोनों पक्षों ने पायलट सुरक्षा जोन बनाने की योजना पर भी सहमति व्यक्त की है। इन क्षेत्रों में केवल लेबनानी सशस्त्र बलों की मौजूदगी होगी और किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र संगठन को वहां गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो सीमा पर होने वाले संघर्षों में कमी आ सकती है और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया को बल मिलेगा।
इजरायल और लेबनान की अलग-अलग प्राथमिकताएं
इजरायल ने वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता हिज्बुल्ला का निरस्त्रीकरण और पूरे लेबनान में उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करना है। वहीं लेबनान ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।
लेबनान ने यह भी कहा कि वह अपनी सशस्त्र सेनाओं को और मजबूत करेगा ताकि पूरे देश में प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। इस दिशा में अमेरिका ने लेबनानी सेना को सहयोग और प्रशिक्षण सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर रहेगा फोकस
संयुक्त बयान में क्षेत्र में सक्रिय बाहरी समर्थन प्राप्त सशस्त्र समूहों और अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों पर भी चिंता जताई गई। सभी पक्षों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
विश्लेषकों के अनुसार यह युद्धविराम समझौता केवल इजरायल और लेबनान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि हिज्बुल्ला और अन्य संबंधित पक्ष समझौते की शर्तों का कितना पालन करते हैं। यदि सभी पक्ष प्रतिबद्धता दिखाते हैं तो क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव कम होने और स्थिरता लौटने की संभावना बढ़ सकती है।