नई दिल्ली: परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। संभावित रूप से यह विशेष सत्र 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर विपक्ष के रुख को समझने की कोशिश की। दोनों नेताओं के साथ हुई यह बैठक करीब 50 मिनट तक चली। माना जा रहा है कि सरकार विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्षी दलों के समर्थन और सदन में जरूरी संख्या बल को लेकर रणनीति बना रही है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। इसके लिए सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है। संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में विशेष बहुमत जरूरी होता है। ऐसे में सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके पास पर्याप्त संख्या बल और सहयोगी दलों का समर्थन मौजूद हो।
विपक्ष ने संसद परिसर में किया प्रदर्शन
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सरकार कई अहम मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। विपक्ष 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज और राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब की मांग कर रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामा भी देखने को मिल रहा है।
अप्रैल में भी बुलाया गया था विशेष सत्र
इससे पहले सरकार ने अप्रैल में भी संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। उस दौरान परिसीमन संशोधन संविधान विधेयक, संविधान संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, 18 अप्रैल को एक संवैधानिक संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ, लेकिन सरकार उसे लोकसभा में पारित नहीं करा सकी। इसके बाद अन्य विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया गया। अब सरकार एक बार फिर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
क्या है परिसीमन बिल?
परिसीमन बिल का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या को नए सिरे से निर्धारित करना है। इसके लिए एक नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रस्ताव है, जो नई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करेगा। इस प्रक्रिया के बाद देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को भी इससे जोड़ा जा रहा है।
परिसीमन की प्रक्रिया क्या होती है?
परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण या पुनर्निर्धारण होता है। इसमें यह तय किया जाता है कि कौन-सा क्षेत्र किस विधानसभा या लोकसभा सीट के अंतर्गत आएगा। यह प्रक्रिया आमतौर पर जनसंख्या, क्षेत्रफल और जनसंख्या घनत्व जैसे मानकों के आधार पर की जाती है। परिसीमन केवल लोकसभा या विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं होता, बल्कि नगर निगम और स्थानीय निकायों के वार्डों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, किसी शहर का कोई इलाका पहले एक वार्ड में शामिल हो सकता है, लेकिन परिसीमन के बाद उसकी सीमा बदलने से वह दूसरे वार्ड का हिस्सा बन सकता है।
2026 परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज
देश में लंबे समय से सीटों के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है। खासकर दक्षिणी राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नए परिसीमन में नुकसान हो सकता है। वहीं, केंद्र सरकार का तर्क है कि बदलती जनसंख्या और प्रतिनिधित्व की जरूरतों को देखते हुए परिसीमन जरूरी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार विशेष सत्र कब बुलाती है और परिसीमन विधेयक पर राजनीतिक सहमति कैसे बनती है।