दिल्ली-एनसीआर की हवा हुई जहरीली, GRAP-1 लागू: जानिए किन गतिविधियों पर लगी रोक, पार्किंग चार्ज भी होगा दोगुना
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच GRAP-1 लागू कर दिया गया है। कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल, निर्माण कार्यों और वाहनों पर सख्ती के साथ पार्किंग शुल्क बढ़ाने समेत सरकार के प्रदूषण नियंत्रण उपायों की पूरी जानकारी पढ़ें।;
नई दिल्ली। सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा है। राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू करने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को और बढ़ने से रोकना तथा हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। 21 अक्टूबर को सुबह 9 बजे यह बढ़कर 233 और दोपहर 2 बजे 244 दर्ज किया गया। AQI का 201 से 300 के बीच होना खराब श्रेणी माना जाता है। मौसम संबंधी अनुमानों में भी आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर खराब रहने की आशंका जताई गई है।
GRAP-1 के तहत इन गतिविधियों पर रहेगी सख्ती
GRAP-1 लागू होने के बाद NCR में संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तत्काल लागू करने और उनकी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस चरण में धूल, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
होटल, रेस्टोरेंट और खुले में संचालित खाने-पीने की दुकानों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। इनके स्थान पर गैस, बिजली या अन्य स्वच्छ ईंधन वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना होगा। सामान्य बिजली आपूर्ति के लिए डीजल जनरेटर चलाने पर भी पाबंदी रहेगी। हालांकि, आवश्यक और आपात परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल की अनुमति नियमों के अनुसार दी जा सकती है।
पार्किंग शुल्क दोगुना, PUC प्रमाणपत्र पर भी सख्ती
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री के अनुसार, सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इनमें मेट्रो पार्किंग सुविधाओं को छोड़कर दिल्ली में पार्किंग शुल्क दोगुना करना भी शामिल है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि 1 नवंबर से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा, सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाई जा सके।
निर्माण कार्यों, धूल और खुले में कचरा जलाने पर नजर
पर्यावरण मंत्री ने खुले में निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने की बात कही है। उनके अनुसार, खुले में तोड़फोड़ का काम 30 नवंबर तक बंद रखने की योजना है। खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर भी सख्ती की जाएगी।
सरकार का दावा है कि धूल कम करने के लिए दिल्ली में 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट-स्प्रे यूनिट लगाई गई हैं। निर्माण गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) और यातायात प्रबंधन के लिए AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
सरकार की लोगों से सहयोग की अपील
दिल्ली सरकार प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान के लिए IIT मद्रास के साथ तकनीकी सहयोग और कृत्रिम बारिश की संभावनाओं पर IIT कानपुर के साथ काम करने की बात कह रही है। सरकार ने नागरिकों से कारपूलिंग अपनाने, खुले में कचरा नहीं जलाने और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करने की अपील की है।
प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सरकारी कार्रवाई के साथ नागरिकों की भागीदारी भी अहम होगी। आने वाले दिनों में AQI की स्थिति के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की जाएगी।