‘बांग्लादेश में तख्तापलट के लिए अमेरिका ने खर्च किए 50 मिलियन डॉलर’, शेख हसीना के बेटे का सनसनीखेज दावा

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में उनकी मां की सरकार गिराने में अमेरिका की भूमिका थी। उन्होंने USAID के जरिए 50 मिलियन डॉलर की कथित फंडिंग का दावा किया, हालांकि इसके समर्थन में सबूत पेश नहीं किए।;

Update: 2026-10-21 08:48 GMT
नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने आरोप लगाया है कि अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन शामिल था। जॉय का दावा है कि अमेरिकी एजेंसी USAID के माध्यम से कथित तौर पर 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 4 अरब रुपये से अधिक की फंडिंग की गई थी। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है और इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

USAID के जरिए फंडिंग का दावा

सजीब वाजेद जॉय ने वॉशिंगटन में सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बाइडेन प्रशासन की नीतियों और अमेरिकी एजेंसियों की गतिविधियों ने शेख हसीना की सरकार को सत्ता से हटाने में भूमिका निभाई।

जॉय के मुताबिक, USAID के अलावा लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले कुछ संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल समूहों को संगठित करने में मदद की। उन्होंने नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट और इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट पर भी प्रदर्शनकारियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें जुटाने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि करने वाले प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने पर सवाल

जॉय ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यूनुस की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि अमेरिकी कूटनीतिक दबाव के कारण बांग्लादेश के सैन्य नेतृत्व ने यूनुस को अंतरिम प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया। उन्होंने ढाका में अमेरिकी राजदूत की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर हुए छात्र आंदोलनों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन बना। सत्ता परिवर्तन के पीछे विदेशी हस्तक्षेप होने के जॉय के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

चरमपंथ और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता

सजीब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश में चरमपंथी संगठनों की कथित बढ़ती गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ दोषी ठहराए गए उग्रवादियों को रिहा किया गया और चरमपंथी समूहों को दोबारा सक्रिय होने का अवसर मिला।

उन्होंने पाकिस्तान से जुड़े संगठनों और लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंध रखने वाले लोगों की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। जॉय के अनुसार, बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक और सुरक्षा समीकरण भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया के लिए चुनौती बन सकते हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

चीन से नजदीकी और बोइंग विमानों के समझौते पर सवाल

जॉय ने आरोप लगाया कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश के चीन के साथ संबंध मजबूत हुए हैं। उन्होंने चीन की कंपनियों को लाभ पहुंचाने और कारोबारी समझौतों में भ्रष्टाचार होने का दावा भी किया।

इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग के साथ 29 विमानों के कथित अनुबंध और ऊर्जा आपूर्ति समझौतों का जिक्र करते हुए बांग्लादेश की भुगतान क्षमता पर सवाल उठाए। इन दावों के समर्थन में भी विस्तृत प्रमाण पेश नहीं किए गए।

राजनीतिक अस्थिरता से अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

शेख हसीना सरकार में वरिष्ठ अधिकारी रहे अहमद कैकाउस ने भी बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता पर चिंता जताई। उनका कहना है कि संस्थानों की कमजोरी और राजनीतिक विभाजन से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जॉय के आरोपों ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और अमेरिका की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन दावों को फिलहाल आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत सामने नहीं आए हैं।

Tags:    

Similar News