यूरोप में विरोध की आग: अल्बानिया में 8वें दिन भी हिंसा, इटली में सख्त कानून; फ्रांस के शहरों में कर्फ्यू
यूरोप के कई देशों में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और आवास संकट के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। अल्बानिया में आठवें दिन झड़पें, इटली में कड़े सुरक्षा कानून और फ्रांस में कर्फ्यू बढ़ाया गया।;
नई दिल्ली। यूरोप के कई देशों में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन आठवें दिन भी जारी रहे, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। इटली में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सख्त सुरक्षा कानूनों को मंजूरी दी है। वहीं, दक्षिणी इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। फ्रांस के कई इलाकों में सप्ताहांत की हिंसा के बाद कर्फ्यू भी बढ़ाया गया है।
अल्बानिया में आठवें दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत
अल्बानिया की राजधानी तिराना में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन में हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में ट्यूशन फीस कम करना, शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाना और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारी समाजवादी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग वास्तविक समस्याओं का इस्तेमाल हिंसा भड़काने और सरकार गिराने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने महंगाई, आवास और रोजगार से जुड़ी चिंताओं को वास्तविक माना, लेकिन हिंसक गतिविधियों की आलोचना की।
इटली में हिंसा के बाद सरकार का सख्त रुख
इटली में सप्ताहांत के दौरान मिलान समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद सरकार ने नए सुरक्षा उपायों को मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के तहत समूह में हिंसक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने पर पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना हो सकता है। चेहरा छिपाने या किसी के घायल होने जैसी परिस्थितियों में सजा बढ़ सकती है।
सरकार ने नाबालिगों की ओर से की गई तोड़फोड़ और लूटपाट के मामलों में उनके माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान भी किया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि केवल कड़े कानूनों से अपराध और सामाजिक असंतोष के मूल कारण दूर नहीं होंगे।
ट्रक चालकों की हड़ताल से खाद्य आपूर्ति प्रभावित
दक्षिणी इटली में ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध में ट्रक चालकों की हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है। नेपल्स के आसपास वितरण गोदामों में सामान की लोडिंग और अनलोडिंग बाधित होने से कुछ सुपरमार्केट में खाद्य पदार्थों की कमी होने लगी है।
सिसिली, कैलाब्रिया और पुगलिया के कुछ इलाकों में भी सामान की उपलब्धता प्रभावित होने की खबरें हैं। दुकानदारों ने ग्राहकों को कुछ उत्पाद सीमित मात्रा में मिलने की चेतावनी दी है। हड़ताल लंबी चलने पर आम लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है।
फ्रांस में हिंसा के बाद कर्फ्यू बढ़ाया गया
फ्रांस में सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ के बाद स्थानीय प्रशासन ने कई इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। पेरिस में पुलिस प्रीफेक्चर ने मंगलवार रात 11 बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लागू किया।
प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और दोबारा हिंसा की आशंका को नियंत्रित करना है।
आर्थिक दबाव से बढ़ रहा जनाक्रोश
यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन महंगाई, महंगे आवास, ईंधन की कीमतें और सरकारी सेवाओं को लेकर असंतोष कई देशों में समान रूप से दिखाई दे रहा है। स्पेन और पुर्तगाल में भी आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि ग्रीस में रैलियों की योजना बनाई गई है।
अल्बानिया में शिक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दों से शुरू हुआ विरोध सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया है। इटली में हड़ताल और सुरक्षा कानूनों को लेकर बहस जारी है, जबकि फ्रांस में प्रशासन हिंसा रोकने के लिए प्रतिबंध बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में इन देशों की सरकारों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ आर्थिक परेशानियों का समाधान निकालना भी बड़ी चुनौती होगी।