'किरेन रिजिजू सिर्फ मोहरा’, खरगे का पीएम मोदी पर हमला, बोले- विपक्ष के सवालों का खुद जवाब क्यों नहीं देते?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने किरेन रिजिजू को मोहरा बताते हुए मणिपुर हिंसा पर भी केंद्र सरकार से सवाल किए।;
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने उन्हें महज एक ‘मोहरा’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष के नेताओं के पत्रों का जवाब खुद देने के बजाय दूसरे मंत्रियों के माध्यम से दिलवाते हैं। खरगे ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री कानून और संविधान से ऊपर हैं?
किरेन रिजिजू को बताया प्रधानमंत्री का मोहरा
दरअसल, किरेन रिजिजू ने खरगे को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग के संबंध में जवाब दिया था। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि रिजिजू को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं और उनका इस्तेमाल केवल एक माध्यम के तौर पर किया जा रहा है।
खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्ष के नेताओं के सवालों का सीधे जवाब नहीं देते। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री को पत्र लिखता है, लेकिन जवाब किसी दूसरे व्यक्ति से तैयार करवाया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, यह विपक्षी नेताओं का अपमान है।
‘क्या प्रधानमंत्री कानून और संविधान से ऊपर हैं?’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और उसके सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के 543 सांसदों में से एक हैं और प्रधानमंत्री होने के कारण उनकी जिम्मेदारी अधिक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी कर सकते हैं।
खरगे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार मनमानी और तानाशाही का रवैया जारी रखती है, तो जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने दशहरे का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार अपनी गलतियों में सुधार नहीं करती, तो उसे राजनीतिक रूप से इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
परिसीमन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की मांग
खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद में परिसीमन संशोधन विधेयक पेश किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। रिजिजू ने अपने जवाब में कहा कि सरकार विधेयक पर विपक्ष के साथ बातचीत और विचार-विमर्श के लिए तैयार है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस की मांग है कि विधेयक से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए, ताकि संसद में निर्णय लेने से पहले विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले।
मणिपुर हिंसा पर भी केंद्र को घेरा
खरगे ने मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नाकामी के कारण राज्य में हिंसा की घटनाएं फिर बढ़ रही हैं। उन्होंने हालिया घटनाओं में चार नागरिकों की हत्या का उल्लेख करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
खरगे के मुताबिक, मई 2023 से अब तक मणिपुर में 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि स्थिति सामान्य करने और निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
परिसीमन विधेयक और मणिपुर हिंसा को लेकर खरगे के ताजा बयानों से केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।